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तीन राशियों पर शनि है भारी, जानिए साढ़ेसाती कब-कब होती है कष्टकारी

Mon, 27 Jul 2020 05:49 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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शनिदेव
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार शनि की साढ़ेसाती और महादशा काफी कष्टकारी होती है। शनि की साढ़ेसाती होने पर व्यक्ति को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बनते हुए काम बिगड़ने लगते हैं। नौकरी और व्यापार में परेशानियों का सामना करना पड़ता है और बीमारियां होने लगती हैं। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में एक बार साढ़ेसाती जरूर आती है। वैदिक ज्योतिषशास्त्र में शनिदेव को कर्मफलदाता कहा गया है। वह व्यक्तियों को उनके कर्मो के हिसाब से अच्छा और बुरा दोनों तरह के फल प्रदान करते हैं। शनिदेव न सिर्फ प्रताड़ित करते हैं बल्कि प्रसन्न होने पर और कुंडली में शुभ भाव में बैठने पर रंक को राजा भी बना देते हैं।

 
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shanidev
कब-कब लगता है शनि दोष
कई स्थितियों में किसी जातक के ऊपर शनि दोष चढ़ता है। शनि जब मेष राशि होता है तो उसे नीच का माना जाता है। जब शनि शत्रु राशि में जाता है तब भी शनि दोष पैदा हो जाता है। ऐसे में जातक को शनि परेशान करते हैं। शनि सूर्य और चंद्रमा के साथ युति बनाने पर शनि दोष पैदा होता है।
 
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मकर राशि में शनि - फोटो : shani transit 2020
क्या होती है शनि साढ़ेसाती
ज्योतिष गणना के अनुसार चंद्र राशि से जब शनि 12वें, पहले और द्वितीय भाव में रहता तो उस अवधि को शनि की साढ़ेसाती कहा जाता है। 
 

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शनि 2020
इन लोगों पर रहती है शनि की टेढ़ी नजर
शनि न्याय के देवता हैं, इसलिए इन्हें दण्डाधिकारी की पदवी प्राप्त है। ऐसे में जो असहायों और गरीबों को परेशान करता है उस पर शनि की टेढ़ी नजर होती है। 
 
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साल 2020 में शनि ग्रह
तीन राशियों पर शनि की साढ़ेसाती
शनि तुला में उच्च और मेष राशि में नीच भाव में होते हैं। कुंडली में शनि की महादशा 19 वर्ष की होती है। शनि सभी ग्रहों में सबसे धीमी चाल से चलते हैं। यह एक राशि से दूसरी राशि में जाने तक ढाई वर्ष का समय लेते हैं। ऐसे में किसी राशि पर शनि की साढ़ेसाती सात साल की होती है।  शनि इस समय मकर राशि में है। ऐसे में धनु, मकर और कुंभ पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है।  शनि की साढ़ेसाती साढ़े सात वर्षों तक रहती है। साढ़ेसाती तीन चरणों में होती है। पहले चरण में शनि की साढ़ेसाती बहुत ही कष्टकारी होती है। दूसरे चरण की साढ़ेसाती में व्यक्ति को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है और अंतिम चरण की साढ़ेसाती को भी अच्छा नहीं माना जाता है। इसमें व्यक्ति के मेहनत करने के बाद भी उसकी किस्मत साथ नहीं देती है।
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shani dev
साढ़ेसाती और शनि ढैय्या को कम करने के उपाय
शनिवार को भगवान शनि की पूजा करें। शनि स्तोत्र - नमस्ते कोण संस्थाय पिंगलाय नमोस्तुते। नमस्ते विष्णु रूपाय कृष्णाय च नमोस्तुते।। नमस्ते रौद्र देहाय नमस्ते कालकायजे। नमस्ते यम संज्ञाय शनैश्चर नमोस्तुते। प्रसादं कुरु देवेश दीनस्य प्रणतस्य च। का जप करें। रोजाना हनुमान चालीसा का तीन बार पाठ करें, शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या, दशा, अंतर्दशा सभी के बुरे प्रभाव से छुटकारा मिलेगा। महामृत्युंजय मंत्र को पढ़ते हुए भगवान शिव की पूजा करें। काला चना, सरसों का तेल, लोहे का सामान एवं काली वस्तुओं का दान करें। शनिवार सरसों या तिल के तेल को शनि देव पर चढ़ाएं।
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