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धनु, मकर और कुंभ समेत कुल पांच राशियों पर हैं शनि की छाया, जानिए कुछ उपाय

Sun, 29 Nov 2020 11:31 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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शनि बहुत ही मंद गति से चलने वाले ग्रह हैं जिस कारण से जिन जातकों पर इनका प्रभाव पड़ता है उस असर काफी दिनों तक रहता है। - फोटो : अमर उजाला
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि बहुत ही प्रभावशाली ग्रह हैं। शनि को सभी ग्रहों में इन्हें न्यायाधीश का दर्जा प्राप्त है। शनि देव व्यक्ति को उनके द्वारा किए गए अच्छे और बुरे बर्ताव के आधार पर ही शुभ या अशुभ फल देते हैं। शनि जब भी अपनी चाल बदलते हैं इस प्रभाव सभी राशियों के जातकों को गहरा पड़ता है। शनि बहुत ही मंद गति से चलने वाले ग्रह हैं जिस कारण से जिन जातकों पर इनका प्रभाव पड़ता है उस असर काफी दिनों तक रहता है। शनि करीब ढाई सालों में अपनी राशि बदलते हैं। शनि के राशि बदलने पर कुछ राशियों पर शनि की साढ़ेसाती तो कुछ पर ढैय्या सवार हो जाती है। शनि की दशा चलने पर व्यक्ति को कई तरह की परेशानियों से जूझना पड़ता है।

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shanidev
Shani Sade Sati 2020: शनि एक राशि से दूसरी राशि में जाने के लिए करीब ढाई वर्षों का समय लेते हैं। शनि इस समय मकर राशि में गोचर हैं। शनि मकर राशि में रहते हुए 29 सितंबर से मार्गी चाल से चल रहे हैं। ऐसे में धनु, मकर और कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है। इसके अलावा मिथुन और  तुला राशि पर शनि की ढैय्या चल रही है। 
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मकर राशि में शनि
कुंडली में शुभ शनि
जब शनिदेव किसी व्यक्ति की कुंडली में शुभ स्थिति में होते हैं तो व्यक्ति को उच्च पद, धन लाभ, मान सम्मान और समाज में लोकप्रिय बनाते हैं। इसके अलावा नौकरी और व्यापार में व्यक्ति को बहुत ही फायदा और तरक्की मिलती है।

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shani transit 2020
कुंडली में अशुभ शनि
वहीं दूसरी तरफ अगर किसी की जन्म कुंडली में शनि अशुभ भाव में आ कर बैठ जाते हैं। तब व्यक्ति के ऊपर शनि की साढ़ेसाती सवार हो जाती है। शनि की अशुभ छाया पड़ने से व्यक्ति को हर दिशा से परेशानियां मिलती है। नौकरी, व्यापार, करियर और सेहत संबंधित तमाम तरह की दिक्कतें आने लगती है।
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शनि वक्री
शनि देव को प्रसन्न करने के मंत्र
- "ॐ शं शनैश्चराय नमः"
- "ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः"
- "ॐ शन्नो देविर्भिष्ठयः आपो भवन्तु पीतये। स
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shani dev
शनि देव की पूजा विधि
भगवान शनि की पूजा अन्य किसी दूसरे देवी-देवताओं की पूजा से अलग तरह से की जाती है।
 - शनि देव की पूजा करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि शनिदेव की आंखों में भूलकर भी न देखें। बल्कि शनिदेव की चरणों की तरफ ध्यान देना चाहिए।
 - शनिदेव की शिलारूप में पूजा करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। उसी मंदिर में पूजा आराधना करनी चाहिए जहां शनिदेव शिला के रूप में विराजमान हों।
 - शमी और पीपल के पेड़ की आराधना करने से शनिदेव कम कष्ट देते हैं।
 - शनि देव के समक्ष दीपक जलाना चाहिए।
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shani dev
शनि साढ़ेसाती के उपाय
- प्रत्येक शनिवार को शनि देव के लिए उपवास रखें और शनि मंदिर जाकर शनिदेव को तेल अर्पित करें।
- शनिवार की शाम को पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं और सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
- शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए हनुमानजी की पूजा और नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करें।
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