ज्योतिष में सभी ग्रहों में शनि ग्रह का विशेष महत्व होता है। शनि ग्रह को न्याय का देवता माना गया है। जो जातकों को उसके द्वारा किए गए कर्मों के आधार पर फल देते हैं। सभी ग्रहों में शनि सबसे धीमी गति से चलने वाले ग्रह हैं जिस कारण से जातकों की कुंडली में शनि का प्रभाव काफी समय तक बना रहता है। जातक की कुंडली में शनि की अशुभ द्दष्टि होने से व्यक्ति के जीवन में कई तरह की परेशानियां आती हैं, लेकिन अगर जातक की कुंडली में शनि की शुभ द्दष्टि है तो कई तरह के अच्छे फल और परिणाम मिलते हैं। वैदिक ज्योतिष में शनि को आयु, रोग, पीड़ा, परेशानी, लोहा, खनिज तेल, कर्मचारी, सेवक और जेल कारक माना गया है।
वैदिक ज्योतिष में शनि को मकर और कुंभ राशि का स्वामित्व प्राप्त है। शनि देव तुला राशि में उच्च के और मेष राशि में नीच के माने गए हैं। शनि का गोचर एक राशि से दूसरी राशि में लगभग ढाई वर्षो के लिए होता है। जब शनि राशि बदलते हैं तो शनि की दशा साढ़े सात वर्ष की होती है इसे ही शनि की साढ़ेसाती और शनि की ढैय्या कहते हैं। वर्तमान समय में शनि मकर राशि में विराजमान हैं, क्योंकि 24 जनवरी 2020 को शनि का राशि परिवर्तन हुआ था, जब वे धनु राशि को छोडकर मकर राशि में प्रवेश किया था। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शनि के मकर राशि में होने से धनु, मकर और कुंभ राशि साढ़ेसाती और मिथुन व तुला राशि पर ढैय्या का प्रभाव है। अब इसके बाद शनि का अगला राशि परिवर्तन अगले साल यानी 2022 में होगा। 2022 में शनि के राशि परिवर्तन से किन राशियों पर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव रहेगा आइए जानते हैं।