ज्योतिषशास्त्र के अनुसार कुल नौ ग्रह होते हैं। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार राहु और केतु शनि के आदेश पर कार्य करते हैं। आज हम आपको शनि, राहु और केतु के प्रभावों के बारें में बताने जा रहे हैं।
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शनि के शुभ प्रभाव से व्यक्ति स्वंय का और जगत का कल्याण करने लगता है
शनि के शुभ प्रभाव
शनि के शुभ प्रभाव से व्यक्ति स्वंय का और जगत का कल्याण करने लगता है।
व्यक्ति अनुशासन में रहने लगता है।
धार्मिक कार्यों में मन लगने लगता है।
व्यक्ति सच्चाई और अच्छाई के मार्ग में चलने लगता है और दुसरो को भी सच्चाई के मार्ग में चलने के लिए प्रेरित करता है।
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शनि के अशुभ प्रभाव से किसी भी काम में मन नहीं लगता है
शनि के अशुभ प्रभाव
शनि के अशुभ प्रभाव से किसी भी काम में मन नहीं लगता है।
शनि के दुष्प्रभाव से इंसान आलसी, लापरवाह और कठोर बन जाता है।
मनुष्य बुरे कर्म करने लगता है और साफ सफाई नहीं रखता है।
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राहु के शुभ प्रभाव से इंसान जन्म से ही सिद्ध होता है
राहु के शुभ प्रभाव
राहु के शुभ प्रभाव से इंसान जन्म से ही सिद्ध होता है।
राहु के शुभ प्रभाव से इंसान में अद्भुत चमत्कारी शक्ति होती हैं।
राहु के शुभ प्रभाव से व्यक्ति आध्यात्म की राह खोज लेता है।
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राहु के अशुभ प्रभाव से षडयंत्र और दूसरों को परेशान करने लगता है
राहु के अशुभ प्रभाव
यह राहु का ही अशुभ प्रभाव हैं कि व्यक्ति झूठ, धोखा, छल और कपट जैसी बुरी आदतों का शिकार हो जाता है।
व्यक्ति राहु के अशुभ प्रभाव से षडयंत्र और दूसरों को परेशान करने लगता है।
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केतु के शुभ प्रभाव से व्यक्ति तीर्थ यात्राएं करता है
केतु के शुभ प्रभाव
केतु के शुभ प्रभाव से व्यक्ति तीर्थ यात्राएं करता है।
केतु के शुभ प्रभाव से इंसान सद्गुरू और संत बन जाता है।
केतु के शुभ प्रभाव से अद्भुत व आध्यात्मिक शक्ति मिलती है.
केतु के शुभ प्रभाव से इंसान मुक्ति और मोक्ष के मार्ग पर चलने लगता है।