Nadi Dosh Kya Hota Hai: हिंदू परंपरा में शादी के लिए सबसे कुंडली मिलान की प्रक्रिया को महत्व दिया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, वर-वधू की कुंडली में 36 गुणों को देखकर उनके सुखी, स्थिर और सफल वैवाहिक जीवन के बारे में पता लगाया जा सकता है। कुंडली मिलान वर-वधू के बीच मानसिक, शारीरिक, भावनात्मक अनुकूलता, दोषों (जैसे मंगल दोष), स्वास्थ्य, संतान सुख और भविष्य के तालमेल को परखने के लिए किया जाता है। कुंडली मिलान में “नाड़ी दोष” को विशेष महत्व दिया गया है। आइए जानते हैं कि नाड़ी दोष असल में क्या है, इसे इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है और क्या हर स्थिति में इससे डरना जरूरी है?
कुंडली मिलान में नाड़ी का क्या अर्थ है?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार विवाह से पहले वर-वधु की जन्म कुंडली मिलाकर कुल 36 गुणों का मिलान किया जाता है। इन 36 गुणों में नाड़ी को विशेष महत्व दिया गया है। नाड़ी का संबंध जन्म नक्षत्र से होता है और इसे तीन वर्गों में बांटा गया है,आदि नाड़ी, मध्य नाड़ी और अंत नाड़ी। यदि लड़का और लड़की दोनों की नाड़ी समान हो, तो इसे नाड़ी दोष कहा जाता है। शास्त्रों में माना गया है कि ऐसा योग वैवाहिक जीवन में चुनौतियां पैदा कर सकता है, इसलिए इसे गंभीरता से लिया जाता है।