आज यानी मंगलवार, 17 नवंबर को सुख, संपदा और ऐश्वर्य प्रदान करने वाले शुक्र ग्रह तुला राशि में प्रवेश कर चुके हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नियमित अंतराल पर सभी ग्रह एक राशि से दूसरी राशि में जाते रहते हैं इसे ही ग्रहों का गोचर कहा जाता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में सभी ग्रहों का अलग-अलग महत्व होता है। ज्योतिष में शुक्र ग्रह को एक शुभ ग्रह माना गया है। शुक्र ग्रह भौतिक सुख संपन्नता, वैवाहिक सुख, विलासिता, यश, कला, सौन्दर्य, रोमांस और फैशन का कारक है। शुक्र वृषभ और तुला राशि के स्वामी माने गए हैं। मीन इनकी उच्च राशि जबकि कन्या इनकी नीच राशि होती है। अगर शत्रु और मित्र की बात करें तो बुध और शनि इनके मित्र ग्रह होते हैं जबकि सूर्य और चंद्रमा इनके शत्रु ग्रह होते हैं। शुक्र एक राशि में 23 दिनों तक रहते हैं यानी 23 दिनों के बाद यह अपनी राशि को बदलकर दूसरी राशि में गोचर करने लगते हैं।
जिस किसी भी जातक के लग्न भाव में शुक्र ग्रह होता है उसकी काया सुंदर और व्यक्तित्व आर्कषक होता है। जिन जातकों की कुंडली में शुक्र ग्रह मजबूत होते हैं उन्हें अपने जीवन में उन्हें हर तरह के भौतिक सुख के आनंद की प्राप्ति होती है। वहीं अगर कुंडली में शुक्र की स्थिति कमजोर है तो व्यक्ति के जीवन में भौतिक सुख-सुविधाओं की कमी रहती है। इसके अलावा वैवाहिक जीवन में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अपनी तुला राशि पर गोचर करते हुए शुक्र सभी बारह राशियों में किन राशियों पर शुभ प्रभाव डालेंगे इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।