मेदिनी ज्योतिष में ग्रहों की विभिन्न राशियों में बनने वाली युति और दृष्टियों के योग मौसम में आने वाले बड़े परिवर्तनों का संकेत देते हैं। सूखा, बाढ़, भूस्खलन आदि का पूर्वानुमान गोचर में ग्रहों के चल रहे योगों से कुछ सीमा तक लगाया जा सकता है। अभी पिछले दो दिनों में उत्तराखंड में बादल फटने के कारण मची तबाही ने वर्ष 2013 के केदारनाथ हादसे की बुरी यादों को फिर से ताजा कर दिया है।
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बार-बार बादल फटने से उत्तराखंड में तबाही की ये है वजह
साल 2013 में जून के दूसरे पखवाड़े के अंत में बनी गुरु, बुध और शुक्र की युति ने उत्तराखंड में भयंकर जल-प्रलय ला दिया था। मेदिनी ज्योतिष में शुभ ग्रहों की युति या परस्पर दृष्टि को वर्षा कारक माना जाता है। वहीं यदि ठीक उसी समय पाप ग्रह भी जल-तत्व राशियों में चल रहे हों तो वर्षा काल में जनधन की भारी हानि होती है।
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बार-बार बादल फटने से उत्तराखंड में तबाही की ये है वजह
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बाढ
श्रावण मास का आरम्भ 19 जुलाई को होगा जो 18 अगस्त तक रहेगा। वर्तमान में बुध और शुक्र की मिथुन राशि में युति ने उत्तराखंड में वर्षा से जनजीवन अस्त व्यस्त कर रख है। श्रावण मास में बुध और शुक्र पहले कर्क और फिर सिंह राशि में गोचर करते हुए कई स्थानों पर भारी वर्षा का योग बनाएंगे।
बार-बार बादल फटने से उत्तराखंड में तबाही की ये है वजह
इस बार श्रावण में मंगल और शनि की युति वृश्चिक राशि में बनेगा। वर्तमान में तुला में चल रहा मंगल जब 13 जुलाई को वृश्चिक राशि में आकर शनि से जा मिलेगा तो हिमालय के पहाड़ी क्षेत्रों और उत्तर भारत में भारी वर्षा से जन-धन की हानि होगी।
बाद में अगस्त के पहले सप्ताह में गुरु, बुध और शुक्र के सिंह राशि में एक साथ रहने से सूखे से जूझ रहे मध्य भारत और गुजरात में अच्छी वर्षा होगी ।किन्तु शनि-मंगल की लम्बे समय तक वृश्चिक में बनने वाली युति के कारण यह वर्ष आसामन्य वर्षा के कारण जाना जायेगा ।उत्तर और दक्षिण भारत में सामान्य से अधिक वर्षा के कारण हानि होगी तो मध्य और पश्चिम भारत में वर्षा में कुछ कमी रह जाएगी।