वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह की विशेष भूमिका मानी जाती है। शनिदेव न्याय और कर्मफलदाता माने जाते हैं। शनि सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह होते हैं। यह एक से दूसरी राशि में परिवर्तन करने के लिए करीब ढाई वर्षों का समय लगाते हैं। शनि इस साल की शुरूआत में ही मकर राशि की यात्रा को छोड़कर कुंभ राशि में प्रवेश किया था जहां पर अब ये पूरे साल इसी राशि में रहेंगे। इसके अलावा शनिदेव जून में वक्री हुए थे और अब आने वाले नवंबर के महीने में मार्गी होंगे। मार्गी होने का मतलब शनि की सीधी चाल से है। शनि के मार्गी होने पर कुछ राशि के जातकों पर इसका विशेष शुभ प्रभाव देखने को मिलेगा। आइए जानते हैं कौन-कौन सी हैं ये राशियां।