वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह की विशेष भूमिका मानी जाती है। शनि ग्रह को आयु, रोग, परेशानी, विज्ञान और तकनीकी आदि के कारक ग्रह माना जाता है। शनि सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह होते हैं। यह एक राशि से दूसरी राशि में स्थान परिवर्तन के लिए लगभग ढाई वर्षों का समय लगाते हैं। शनि की धीमी चाल की वजह से जातकों के ऊपर शनि का शुभ या अशुभ प्रभाव काफी दिनों तक रहता है। जिन जातकों की कुंडली में शनि मजबूत अवस्था में होते हैं उनके जीवन में हर तरह के सुख की प्राप्ति होती है वहीं अगर जातक की कुंडली में शनि कमजोर है तो व्यक्ति के जीवन में परेशानी ही परेशानी होती है।
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वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि ग्रह को दो राशियां का स्वामित्व प्राप्त है। पहला मकर और दूसरा कुंभ राशि को। शनिदेव तुला राशि में उच्च के होते हैं जबकि मेष राशि में नीच के होते हैं। शनि एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं। इसे ही शनि की ढैय्या कहते हैं। शनि की दशा साढ़ेसात साल की होती है जिसे साढ़ेसाती कहा जाता है। इस तरह से ढाई-ढाई साल के तीन चरण होते हैं। वैदिक ज्योतिष में शनि को न्याय के देवता और कर्मफलदाता माना जाता है। शनिदेव व्यक्ति को कर्मों के आधार पर फल प्रदान करते हैं। यानी जो व्यक्ति अच्छे कर्म करता है उन्हें अपने जीवन में शुभ परिणाम की प्राप्ति होती है। वहीं जो जातक अपने जीवन में बुरे कर्म करता है उन्हें शनि दण्ड भी देते हैं। इसी वजह से शनि को दण्डाधिकारी और न्याय का कारक ग्रह माना जाता है।
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वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि के राशि परिवर्तन के अलावा शनि का अस्त और उदय होना भी बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। शनिदेव 18 मार्च को कुंभ राशि में उदय हो रहे हैं। आपको बता दें कि शनि इससे पहले 11 फरवरी 2024 को कुंभ राशि में ही अस्त हुए थे, जो अब 18 मार्च को को सुबह 07 बजकर 49 मिनट पर उदित हो जाएंगे। शनिदेव को दोबारा किसी राशि में आने पर करीब 30 साल का समय लगता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब भी कोई ग्रह सूर्य के निकट एक निश्चित दूरी पर आ जाता है तो सूर्य के तेज के कारण वह अपना मूल प्रभाव छोड़ देता है इसे ही ग्रहों का अस्त होना कहते हैं और जब ग्रह सूर्य से दूर होता है वह उदित होता जाता है। ज्योतिष में जब भी कोई ग्रह अस्त होता है तो उसे शुभ नहीं माना जाता है वहीं जब कोई ग्रह उदय होता वह अपने मूल स्वभाव में दोबारा आ जाता है।
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शनि के कुंभ राशि में उदय होने से राशियों पर प्रभाव मेष राशि
18 मार्च से शनि का कुंभ राशि में उदय होने से काफी दिनों से चली आ रही आपकी परेशानियां खत्म होगी। मेष राशि के जातकों के लिए शनि दसवें और ग्यारहवें भाव के स्वामी हैं।
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वृषभ राशि
कुंभ राशि में शनि के उदय होने से आपको भाग्य का पूरा साथ मिलेगा और कार्यक्षेत्र में उन्नति के अवसर मिलेंगे। वृषभ राशि के जातकों के लिए शनि नवम भाव और दशम भाव के स्वामी हैं और वर्तमान समय में आपके दशम भाव में गोचर कर रहे हैं।
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मिथुन राशि
आपके लिए शनि का उदय होना किसी चमत्कार से कम नहीं होगा। रुके हुए काम अचानक से दोबारा से शुरू होंगे। मिथुन राशि के जातकों के लिए शनि अष्टम भाव और नवम भाव के स्वामी हैं।
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कर्क राशि
कर्क राशि के जातकों के लिए शनि 7वें भाव और 8वें भाव के स्वामी हैं। आपको अपनी सेहत पर विशेष ध्यान देना होगा।
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सिंह राशि
इस राशि के जातकों के लिए शनिदेव छठे और सातवें भाव के स्वामी हैं। ऐसे में व्यापार में जो लोग किसी के साथ साझेदारी में उन्हें अच्छा मुनाफा मिल सकता है।
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कन्या राशि
जिन जातकों का जन्म कन्या लग्न में हुआ है उनके लिए शनि देव पांचवें और छठे भाव के स्वामी हैं। आपके लिए शनि का उदय होना शुभ रहेगा। आर्थिक स्थितियां आपके पक्ष में रहेंगी और कार्य में आने वाली बाधाएं खत्म होगी।
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तुला राशि
तुला राशि में शनि उच्च के होते हैं और आपके लिए शनि कुंडली में केंद्र और त्रिकोण भाव के स्वामी हैं। ऐसे में शनि का उदय होना शुभफल में वृद्धि दिलाएगा।
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वृश्चिक राशि
आपकी राशि के लिए शनि तीसरे भाव और चौथे भाव के स्वामी हैं। ऐसे में आपको अपनी माताजी के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान देना होगा। नौकरीपेशा जातकों को अधिक सतर्कता बरतनी होगी।
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धनु राशि
शनि महाराज आपके दूसरे और तीसरे भाव के स्वामी हैं और कुंभ राशि में शनि का उदय होना आपके लिए अनुकूल रहेगा।
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मकर राशि
मकर राशि के स्वामी शनिदेव हैं और आपके धन भाव के स्वामी हैं। ऐसे मे आपको अतिरिक्त धन की प्राप्ति हो सकती है।
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कुंभ राशि
इस समय शनि कुंभ राशि में ही गोचर हैं और इसी राशि में उदय होना बहुत ही खास रहेगा। आपको शुभ फलों की प्राति होगी। शनि देव आपके 12वें भाव के स्वामी और आपकी राशि के स्वामी भी हैं।
मीन राशि
मीन राशि के जातकों के लिए शनि ग्यारहवें और बारहवें भाव के स्वामी ग्रह हैं। आपके लिए बहुत ही शुभ रहेंगे। आपकी इच्छाओं की पूर्ति और भाग्योदय होगा।