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Shani Sade Sati & Dhaiya 2026: कौन-सी 5 राशियां रहेंगी शनि की मार से प्रभावित, यहां जानें सावधानियाँ और उपाय

Wed, 10 Dec 2025 09:27 PM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Shani Sade Sati 2026: साल 2026 में शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या पाँच राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण समय लेकर आएगी। जानें किन राशियों पर शनि का प्रकोप रहेगा और कौन से सरल उपाय उन्हें कठिनाइयों से उबरने में मदद कर सकते हैं।
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शनि की साढ़ेसाती - फोटो : Amar Ujala
Shani Sade Sati 2026: नया साल 2026 भले ही नई उम्मीदें और नई ऊर्जा लेकर आए, लेकिन कुछ राशियों के लिए यह साल चुनौतियों से भरा रह सकता है। इसकी वजह है शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या, जो जीवन में गहराई से प्रभाव डालती है। ज्योतिष शास्त्र में शनि को कर्मों का न्यायाधीश माना गया है, जो व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार परिणाम प्रदान करते हैं। इसलिए उनकी अवधि को परिवर्तन, परिश्रम और आत्मचिंतन का समय कहा जाता है।
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2026 में कई जातकों को शनि की इस परीक्षा से गुजरना होगा, जहाँ धैर्य, संयम और जिम्मेदारी सबसे बड़े हथियार साबित होंगे। ऐसे में यह जानना महत्वपूर्ण है कि कौन-सी राशियाँ शनि के विशेष प्रभाव में रहेंगी और वे किन तरीकों से इस समय को संतुलित और सहज बना सकती हैं। सही उपाय, सकारात्मक सोच और सही दिशा जीवन की कठिन राह को भी आसान बना सकते हैं।
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2026 में नहीं है कोई शनि गोचर - फोटो : adobe

2026 में नहीं है कोई शनि गोचर
मार्च 2025 में शनि के मीन राशि में प्रवेश करने के बाद उनकी स्थिति 2027 के जून महीने तक इसी राशि में स्थिर रहने वाली है। इसका अर्थ यह है कि वर्ष 2026 के दौरान शनि का कोई भी राशि परिवर्तन नहीं होगा। जब शनि लंबे समय तक एक ही राशि में रहते हैं, तो उनका प्रभाव भी उतनी ही स्थिरता के साथ जारी रहता है।

इसी वजह से जिन राशियों पर इस समय साढ़ेसाती या ढैय्या का प्रभाव चल रहा है, उन्हें पूरे 2026 में इसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा। इस वर्ष कोई नया परिवर्तन न होने के कारण, इन राशियों पर शनि की वर्तमान स्थिति से उत्पन्न परिणामों जैसे जिम्मेदारियों में वृद्धि, मानसिक दबाव, चुनौतियाँ और कर्मों की परीक्षा का असर लगातार बना रहेगा। इसलिए 2026 उन राशि वालों के लिए धैर्य, साहस और सही कर्म का वर्ष साबित होगा, जिन पर शनि की दृष्टि इस समय सक्रिय है।

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2026 में साढ़ेसाती से प्रभावित रहेंगी ये राशियां - फोटो : adobe stock
2026 में साढ़ेसाती से प्रभावित रहेंगी ये राशियां 

मेष राशि:  मेष राशि पर साढ़ेसाती की शुरुआत हो चुकी है, इसलिए यह चरण मानसिक अस्थिरता और घरेलू तनाव बढ़ा सकता है। इस समय जल्दबाज़ी या गुस्से में निर्णय लेने से बचना हितकर रहेगा। संयम, शांत मन और सूझबूझ के साथ बनाई गई योजनाएँ आपको आगे बढ़ने में मदद करेंगी और समस्याओं को कम करेंगी।
कुंभ राशि: कुंभ राशि के जातक अब अपनी साढ़ेसाती के अंतिम चरण में प्रवेश कर चुके हैं। यह समय अंत और नयी शुरुआत दोनों का संकेत देता है। यदि आप मेहनत और लगन बनाए रखेंगे तो महत्वपूर्ण कार्यों में सफलता मिलेगी, लेकिन मानसिक दवाब और जिम्मेदारियाँ बढ़ सकती हैं। रोजमर्रा के कामों में भी अतिरिक्त धैर्य और संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता होगी।
मीन राशि: मीन राशि वाले इस समय साढ़ेसाती के मध्य चरण से गुजर रहे हैं, जिसे ज्योतिष में सबसे चुनौतीपूर्ण अवधि माना जाता है। स्वास्थ्य को लेकर विशेष सतर्क रहना जरूरी होगा। आर्थिक स्थिति में उतार-चढ़ाव या अनिश्चितता महसूस हो सकती है। इसके बावजूद यह समय आत्म-विकास, गहरी समझ और आत्मविश्वास को मजबूत बनाने का अवसर भी देता है।

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शनि की ढैया - फोटो : Amar Ujala
इन राशियों पर रहेगा ढैय्या का असर

सिंह राशि: सिंह राशि के जातकों पर शनि की ढैय्या 2026 में भी जारी रहेगी और यह प्रभाव 2027 में शनि के राशि परिवर्तन के बाद समाप्त होगा। इस अवधि में अनावश्यक खर्च बढ़ सकते हैं, यात्रा अधिक करनी पड़ सकती है और मानसिक व शारीरिक थकान महसूस हो सकती है। स्वास्थ्य को लेकर सावधानी रखना और व्यवहार में संतुलन बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण रहेगा। किसी भी निर्णय को जल्दबाज़ी में न लें—स्थिरता और सोच-विचार ही इस समय आपके लिए सुरक्षाकवच का काम करेंगे।

धनु राशि: धनु राशि के लिए 2026 ढैय्या का दूसरा वर्ष होने के कारण चुनौतियाँ और परिवर्तन साथ-साथ चलेंगे। शनि का चतुर्थ भाव से गोचर परिवार, घर, संपत्ति या जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों में देरी या रुकावटें पैदा कर सकता है। हालांकि यह समय जितना परखता है, उतना ही धैर्य, अनुभव और परिपक्वता प्रदान भी करता है। यदि आप शांत मन से स्थिति को संभालेंगे और सही दिशा में प्रयास जारी रखेंगे, तो यह अवधि आपके लिए मजबूत आधार तैयार करेगी।
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शनि को शांत करने के सरल उपाय - फोटो : AI generated

शनि को शांत करने के सरल उपाय

  • शनिवार के दिन शनि देव और हनुमान जी का विधिवत पूजन करने से मन शांत होता है और कार्यों में सकारात्मक गति आने लगती है।
  • सुबह पीपल के वृक्ष पर जल अर्पित करें, सरसों के तेल का दीपक जलाएँ और परिक्रमा करें। यह उपाय शनि के कठोर प्रभाव को कम कर धीरे-धीरे अनुकूलता लाता है।
  • शनिवार को काला तिल, उड़द दाल, काला छाता, जूते-चप्पल या सरसों के तेल का दान करना शुभ माना जाता है। ये दान शनि द्वारा उत्पन्न बाधाओं को कम करने में सहायक होते हैं।
  • शनि चालीसा और हनुमान चालीसा का प्रतिदिन या शनिवार को पाठ करने से मानसिक तनाव घटता है, नकारात्मकता दूर होती है और आत्मविश्वास बढ़ता है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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