वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हर ग्रह समय-समय पर अपनी स्थिति को बदलता रहता है। ग्रहों के राशि परिवर्तन करने से इसका व्यापक प्रभाव सभी राशियों के जातकों के ऊपर पड़ता है। ग्रहों के राशि परिवर्तन के अलावा अक्सर दो या दो से ज्यादा ग्रह किसी एक राशि या नक्षत्र में एक साथ आ जाते हैं, तब ऐसी स्थिति में शुभ और अशुभ दोनों ही तरह का संयोग बनता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शनि और राहु दोनों को ही क्रूर व पापी ग्रह माना जाता है। ऐसे में जब इन दोनों ग्रहों की युति किसी एक राशि या फिर एक नक्षत्र में होती है तो कई राशि वालों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। आपको बता दें कि शनि 17 अक्तूबर तक राहु के स्वामित्व में रहने वाले शतभिषा नक्षत्र में मौजूद रहेंगे। इस तरह से करीब दो महीनों तक राहु और शनि का अशुभ संयोग बना रहेगा जिस कारण से इस युति का बुरा प्रभाव कई राशि के जातकों के ऊपर पड़ने वाला होगा। आइए आपको बताते हैं कि 2 महीनों तक किन-किन राशि वालों को संभलकर रहना होगा।