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Shani Placement In Kundali: कुंडली के किस भाव में स्थित होने पर शनि देते हैं अकूत संपत्ति, यहां जानें

Sun, 04 May 2025 06:45 AM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Shani Placement in Kundali: कई बार शनि को क्रूर ग्रह भी कहा जाता है, क्योंकि जब यह कुंडली में साढ़ेसाती या ढैय्या का प्रभाव डालता है, तो व्यक्ति के जीवन में कुछ कठिनाईयां आ सकती हैं। हालांकि, शनि के द्वारा दिया गया यह समय जीवन को सशक्त बनाने, अनुशासन और आत्मनिर्भरता सिखाने का होता है।
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saturn placement in kundali - फोटो : adobe
Saturn Placement in Kundali: शनि ग्रह को ज्योतिष शास्त्र में एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। यह ग्रह सबसे धीमी गति से चलता है, और इसकी गति इतनी धीमी होती है कि इसे किसी एक राशि में लगभग ढाई साल लगते हैं। इस कारण शनि का प्रभाव व्यक्ति की जीवन यात्रा में लंबी अवधि तक रहता है। शनि को कर्मफलदाता और न्याय का देवता माना जाता है। यह ग्रह हमें हमारे अच्छे और बुरे कर्मों के आधार पर फल देता है।
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कई बार शनि को क्रूर ग्रह भी कहा जाता है, क्योंकि जब यह कुंडली में साढ़ेसाती या ढैय्या का प्रभाव डालता है, तो व्यक्ति के जीवन में कुछ कठिनाईयां आ सकती हैं। हालांकि, शनि के द्वारा दिया गया यह समय जीवन को सशक्त बनाने, अनुशासन और आत्मनिर्भरता सिखाने का होता है। शनि हमेशा हमें यह सिखाते हैं कि बिना मेहनत और ईमानदारी के सफलता संभव नहीं है।
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जब शनि शुभ स्थानों पर होते हैं, तो यह व्यक्ति को स्थिरता, सफलता और समाज में सम्मान भी प्रदान करते हैं। शनि का असल उद्देश्य हमारे कर्मों के अनुसार हमें जीवन की सच्चाई से परिचित कराना है।
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saturn placement in kundali - फोटो : adobe stock
चतुर्थ भाव में शनि
कुंडली का चतुर्थ भाव व्यक्ति की मातृभूमि, संपत्ति, वाहन और सुख-सम्पत्ति से जुड़ा होता है। जब शनि इस भाव में होते हैं, तो यह व्यक्ति को जीवन में स्थायी संपत्ति, घर और सुख-सुविधाओं का आशीर्वाद देते हैं। शनि इस भाव में व्यक्ति को कामयाबी और आत्मनिर्भरता का अनुभव कराते हैं। इस स्थान पर शनि के प्रभाव से व्यक्ति को अपने जीवन में सभी तरह की खुशियों का अनुभव होता है, चाहे वह नौकरी, विवाह, धन या संतान का सुख हो। शनि इस भाव में स्थिरता और संतुलन लाते हैं, जिससे व्यक्ति को जीवन में अपार सफलता और संतोष मिलता है।
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saturn placement in kundali - फोटो : adobe stock
सप्तम भाव में शनि
कुंडली का सप्तम भाव व्यक्ति के वैवाहिक जीवन और साझेदारी से जुड़ा होता है। शनि इस भाव में होने पर व्यक्ति के वैवाहिक जीवन में स्थिरता और खुशहाली आती है। साथ ही, इस स्थान पर शनि व्यापार और साझेदारी के मामलों में भी शुभ फल देते हैं। व्यक्ति व्यापार में बहुत अच्छा लाभ प्राप्त करता है और भाग्य का साथ उसे हर कदम पर मिलता है। इस स्थिति में शनि व्यक्ति को व्यावसायिक दृष्टिकोण से स्थिरता और सफलता देता है, जिससे जीवन में संपूर्ण सुख और समृद्धि आती है।

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saturn placement in kundali - फोटो : अमर उजाला
दशम भाव में शनि
कुंडली का दशम भाव व्यक्ति के करियर, मान-सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़ा होता है। शनि जब इस भाव में होते हैं, तो व्यक्ति को अपने पेशेवर जीवन में सफलता मिलती है। इस स्थिति में व्यक्ति अपने कार्यक्षेत्र में नेतृत्व की क्षमता दिखाता है और उच्च पद प्राप्त करता है। शनि इस भाव में होने से व्यक्ति को अधिकारियों से अच्छे संबंध मिलते हैं और करियर में लगातार उन्नति होती है। शनि का यह प्रभाव व्यक्ति को बड़े फैसले लेने की शक्ति और साहस देता है, जिससे वह अपने क्षेत्र में सफलता हासिल करता है।
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saturn placement in kundali - फोटो : अमर उजाला
लाभ भाव में शनि
कुंडली के ग्यारहवें भाव को लाभ स्थान कहा जाता है, जो कि व्यक्ति की आय, इच्छाओं की पूर्ति और सामाजिक संबंधों से जुड़ा होता है। जब शनि इस भाव में होते हैं, तो व्यक्ति को अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में सफलता मिलती है। शनि इस स्थान पर व्यक्ति को सही दिशा में मार्गदर्शन करते हैं, जिससे उसकी आय में वृद्धि होती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। इस स्थिति में व्यक्ति अपने मेहनत और समझदारी से हर इच्छा पूरी करता है। शनि इस भाव में व्यक्ति को संकल्प और धैर्य देता है, जिससे जीवन में आर्थिक प्रगति होती है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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