सभी ग्रहों में शनि को क्रूर, सबसे धीमी चाल से चलने वाला और शक्तिशाली ग्रह माना जाता है। शनि की धीमी चाल की वजह से इसका प्रभाव जातकों के जीवन पर लंबे समय तक रहता है। ज्योतिष में शनिदेव को न्याय, आयु और अनुशासन का कारक ग्रह माना जाता है। शनि एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं, फिर इसके बाद दूसरी राशि में गोचर करते हैं। इसके अलावा शनि एक निश्चित अंतराल पर नक्षत्र परिवर्तन भी करते हैं। आपको बता हैं कि शनि अभी रेवती नक्षत्र में संचरण कर रहे हैं, जो आने वाले दिनों में यानी 9 अक्तूबर को नक्षत्र परिवर्तन करते हुए उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में गोचर करेंगे। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 9 अक्तूबर 2026 को शनि अपने ही नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, 11 दिसंबर तक मीन राशि में वक्री रहेंगे, फिर 11 दिसंबर को इसी नक्षत्र में वक्री चलें और 12 दिसंबर से लेकर 7 फरवरी 2027 तक इसी नक्षत्र में मार्गी होकर चलेंगे। आइए जानते हैं शनि के स्व नक्षत्र में गोचर करने से किन राशियों को सबसे ज्यादा लाभ मिल सकता है।