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Shani Jayanti 2026: शनि जयंती कब है? जानें सही तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त

Sat, 11 Apr 2026 07:36 AM IST
Jyoti Mehra धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Shani Jayanti 2026: मान्यताओं के अनुसार शनि देव का जन्म ज्येष्ठ अमावस्या तिथि पर हुआ था। शनि जयंती पर सूर्यास्त के बाद शनिदेव की पूजा करना विशेष फलदायी माना गया है। आइए जानते हैं कि इस साल शनि जयंती किस दिन मनाई जाएगी और इस दिन पूजा का शुभ समय क्या रहने वाला है।
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शनि जयंती 2026 - फोटो : Amar Ujala
Shani Jayanti 2026: सूर्यदेव और छाया के पुत्र भगवान शनि का जन्म ज्येष्ठ अमावस्या तिथि पर माना जाता है। इसी कारण हर वर्ष इस तिथि को शनि जयंती के रूप में मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता है कि जब शनि देव प्रसन्न होते हैं, तो अपने भक्तों को हर प्रकार के संकट से बचाते हैं और उनके जीवन में स्थिरता व न्याय का आशीर्वाद देते हैं। खास बात यह है कि इसी दिन वट सावित्री व्रत भी किया जाता है, जिससे इस तिथि का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। शनि जयंती पर सूर्यास्त के बाद शनि देव की पूजा करना विशेष फलदायी माना गया है। आइए जानते हैं कि इस साल शनि जयंती किस दिन मनाई जाएगी और इस दिन पूजा का शुभ समय क्या रहने वाला है।

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शनि जयंती 2026 कब है? - फोटो : adobe stock
शनि जयंती 2026 कब है?
वर्ष 2026 में ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 16 मई की सुबह 5 बजकर 11 मिनट से शुरू होकर 17 मई की सुबह 1 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। शनि देव की पूजा के लिए शाम का समय विशेष शुभ माना गया है। इस दिन रात 7 बजकर 5 मिनट से 8 बजकर 23 मिनट तक पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा, जिसमें विधि-विधान से पूजा करने पर विशेष लाभ प्राप्त हो सकता है।
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शनि जयंती पूजा विधि - फोटो : अमर उजाला
शनि जयंती पूजा विधि
  • शनि जयंती के दिन कुछ विशेष उपाय और अनुष्ठान करने की परंपरा है। 
  • सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर पीपल के वृक्ष की जड़ में कच्चा दूध, गंगाजल और स्वच्छ जल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
  • इसके बाद पीपल की 11 बार परिक्रमा करनी चाहिए। 
  • “ऊं शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का 108 बार जप करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है। 
  • इसके साथ ही लोहा, काला तिल, जामुन, तेल और काले जूते जैसी वस्तुओं का दान करना भी लाभकारी माना गया है।

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शनि जयंती पूजा विधि - फोटो : अमर उजाला
शनि देव को न्याय का देवता कहा जाता है, जो हर व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। जो लोग सच्चाई और ईमानदारी के मार्ग पर चलते हैं, उन्हें शनि देव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उनके जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। वहीं जिन लोगों पर शनि की कृपा नहीं होती, उन्हें कड़ी मेहनत के बाद भी सफलता पाने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।
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दो बार मनाई जाती है शनि जयंती  - फोटो : adobe
दो बार मनाई जाती है शनि जयंती 
शनि जयंती साल में दो बार मनाई जाती है। उत्तर भारत में इसे ज्येष्ठ अमावस्या के दिन मनाने की परंपरा है, जो इस वर्ष 16 मई को है। वहीं दक्षिण भारत में शनि जयंती वैशाख अमावस्या के दिन मनाई जाती है। अलग-अलग परंपराओं के बावजूद इस दिन का आध्यात्मिक महत्व समान रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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