श्रावण मास में पड़ने वाली शिवरात्रि को सावन शिवरात्रि या श्रावण शिवरात्रि कहा जाता है। श्रावण का पूरा महीना भगवान शिव को समर्पित है और उनकी पूजा के लिए शुभ होता है। इसलिए, श्रावण मास में पड़ने वाली शिवरात्रि को भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
Sawan Shivratri 2025 Date: आज सावन शिवरात्रि का पर्व है। हिंदू धर्म में इस त्योहार का विशेष महत्व होता है। एक वर्ष में एक महाशिवरात्रि और 11 शिवरात्रियां पड़ती हैं, जिन्हें मासिक शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। मासिक शिवरात्रि हर माह में एक बार आती है। इस तरह से 12 शिवरात्रि होती हैं। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर शिवरात्रि मनाई जाती है, जिसे मासिक शिवरात्रि कहा जाता है। मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत करने से भगवान शंकर प्रसन्न होते हैं
श्रावण मास में पड़ने वाली शिवरात्रि को सावन शिवरात्रि या श्रावण शिवरात्रि कहा जाता है। श्रावण का पूरा महीना भगवान शिव को समर्पित है और उनकी पूजा के लिए शुभ होता है। इसलिए, श्रावण मास में पड़ने वाली शिवरात्रि को भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
पंचांग के अनुसार सावन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 23 जुलाई 2025 को सुबह 4:39 बजे से होगी और यह तिथि अगले दिन 24 जुलाई को रात 2:28 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार सावन शिवरात्रि का व्रत 23 जुलाई, बुधवार को रखा जाएगा।
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चार प्रहरों की पूजा का महत्व-
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चार प्रहरों की पूजा का महत्व-
शिवरात्रि की रात्रि में चार प्रहरों की पूजा का विशेष विधान है। भक्त रात्रि के प्रत्येक प्रहर में अलग-अलग सामग्रियों से शिव का रुद्राभिषेक करते हैं। जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है। प्रत्येक पहर में शिव को अलग भोग, फूल और मंत्र अर्पित किए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह पूरी रात्रि जागरण और पूजा, भक्त की सारी बाधाओं को दूर करती है और विशेष पुण्य की प्राप्ति कराती है।
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चार प्रहरों की पूजा का महत्व-
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रात्रि को चार प्रहरों में बांटा गया है और शिवरात्रि की पूजा हर प्रहर विशेष विधि से की जाती है। चारों पहरों की पूजा का मुख्य उद्देश्य है शिव के चार रूपों और गुणों की साधना और रात्रि के प्रत्येक भाग में आत्मा को शुद्ध करते हुए शिव में लीन होना। असल में, रात का हर पहर हमारी भीतर की एक अवस्था दर्शाता है, जैसे कि शरीर, मन, आत्मा और ब्रह्म (परमात्मा)। इन चार पहरों में शिव की चार पद्धतियों से आराधना करने पर साधक को पूर्णता प्राप्त होती है।
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चार प्रहरों की पूजा का महत्व-
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लिंग पुराण में कहा गया है कि शिवरात्रि के दिन, विशेषकर श्रावण मास में, उपवास, रात्रि जागरण और शिवलिंग पर बेलपत्र, जल, दुग्ध अर्पित करने से सौभाग्य, दीर्घायु और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी पुराण में एक कथा मिलती है जिसमें चांडाल द्वारा अनजाने में शिवरात्रि के दिन बेलपत्र चढ़ाने से मोक्ष प्राप्त हुआ।
सावन शिवरात्रि की रात्रि को ‘निशीथ काल’ में शिवपूजन का विशेष महत्व है। निशीथ काल, अर्थात मध्यरात्रि में, जब शिव तांडव में लीन होते हैं, उस समय शिवाभिषेक, महामृत्युंजय जाप से विशेष सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं।
अग्नि पुराण में कहा गया है कि – ‘श्रावणस्य तु मासे तु शिवार्चनं विशेषतः। सर्वकामसमृद्ध्यर्थं भवत्येव न संशयः॥’ – अर्थात, श्रावण मास में शिव का पूजन निश्चित ही सर्वकामनाओं की पूर्ति करता है।