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Parshuram Jayanti 2025: परशुराम जयंती शुभ योग, पूजा विधि और इससे जुड़ी खास मान्यताएं

Tue, 29 Apr 2025 06:06 AM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को भगवान विष्णु के छठे अवतार, परशुराम जी की जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष परशुराम जयंती 29 अप्रैल 2025 को पड़ेगी।
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परशुराम जयंती 2025 - फोटो : adobe stock
Parshuram Jayanti 2025: हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को भगवान विष्णु के छठे अवतार, परशुराम जी की जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष परशुराम जयंती 29 अप्रैल 2025 को पड़ेगी। पंचांग के अनुसार, तृतीया तिथि 29 अप्रैल को शाम 05:31 बजे शुरू होगी और 30 अप्रैल को दोपहर 2 बजकर 12 मिनट पर समाप्त होगी। चूंकि भगवान परशुराम का जन्म प्रदोष काल में हुआ था, इसलिए जयंती 29 अप्रैल को ही मनाई जाएगी। आइए जानते हैं इस दिन कौन-कौन से शुभ योग बन रहे हैं और पूजा की विधि क्या रहेगी। इसके अलावा कुछ खास मान्यताओं के बारे में जानेंगे।

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परशुराम जयंती 2025 - फोटो : adobe stock
परशुराम जयंती 2025 के शुभ योग
इस साल परशुराम जयंती पर कुछ विशेष शुभ संयोग बन रहा है। इस दिन सौभाग्य योग 03:54 बजे तक रहेगा। इसके अलावा त्रिपुष्कर योग सुबह 05:42 बजे से शाम 05:31 बजे तक रहेगा और सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 05:42 बजे से शाम 06:47 बजे तक रहेगा। ऐसा माना जाता है कि इन शुभ योगों में भगवान परशुराम की पूजा करने से देवी लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
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परशुराम जयंती 2025 - फोटो : adobe stock
परशुराम जयंती पर पूजा विधि
परशुराम जयंती के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें और भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए दिन की शुरुआत करें। फिर घर की साफ-सफाई करें और गंगाजल मिले जल से स्नान करें। स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें। 

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परशुराम जयंती 2025 - फोटो : adobe stock
इसके बाद विधिपूर्वक भगवान परशुराम की पूजा करें। प्रदोष काल के दौरान व्रत और उपवास रखने का भी विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि प्रदोष काल में व्रत करने से इसका फल कई गुना बढ़ जाता है और व्यक्ति की सभी समस्याएं दूर हो जाती है। 
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भगवान परशुराम - फोटो : adobe stock
परशुराम जी से जुड़ी कुछ खास मान्यता
पौराणिक कथाओं के अनुसार परशुराम जी आज भी धरती पर विराजमान हैं। यही वजह है कि उनकी पूजा विधि भगवान विष्णु के अन्य अवतार श्रीराम और श्रीकृष्ण से भिन्न है। दक्षिण भारत में उडुपी के निकट पजाका नामक स्थान पर परशुराम जी का एक प्रसिद्ध मंदिर भी स्थित है। ऐसी मान्यता है कि भविष्य में भगवान विष्णु के अंतिम अवतार, कल्कि को, परशुराम जी शस्त्र विद्या का ज्ञान कराएंगे।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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