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Nirjala Ekadashi 2025: 5 या 6 जून कब रखा जाएगा निर्जला एकादशी व्रत, यहां जानें तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि

Fri, 30 May 2025 07:26 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Nirjala Ekadashi 2025: पंचांग के मुताबिक ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर  निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस व्रत में पानी के साथ-साथ अन्न फल ग्रहण करने की भी मनाही होती हैं। 
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Nirjala Ekadashi 2025 - फोटो : freepik
Nirjala Ekadashi 2025: साल में 24 एकादशी का व्रत रखा जाता है, जो हर माह के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर पड़ता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उसे समस्त पापों सभी भी छुटकारा मिलता है। हालांकि इन सभी में निर्जला एकादशी को अधिक महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि यह साल की सबसे बड़ी एकादशी है। पंचांग के मुताबिक ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस व्रत में पानी के साथ-साथ अन्न फल ग्रहण करने की भी मनाही होती हैं।

बता दें, ज्येष्ठ माह भीषण गर्मी और उसमें चलने वाली लू के लिए जाना जाता है। ऐसे में बिना पानी के इस उपवास को रखना बेहद कठिन होता है। मान्यता है कि निर्जला एकादशी का व्रत रखने के लिए साधक में संयम, श्रद्धा और शारीरिक शक्ति भी होनी चाहिए। ऐसे में आइए जानते हैं इस साल यह व्रत कब रखा जाएगा।
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Nirjala Ekadashi 2025 - फोटो : adobe
कब है निर्जला एकादशी ?
इस साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 6 जून 2025 को रात 2 बजकर 15 मिनट पर आरंभ हो रही है। इसका समापन 7 जून को सुबह 4 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगा। ऐसे में निर्जला एकादशी का व्रत 6 जून 2025 के दिन रखा जाएगा। इस दिन हस्त नक्षत्र बन रहा है, जो सुबह 6 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। इसपर व्यतीपात योग का संयोग भी बना रहेगा।
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Nirjala Ekadashi 2025 - फोटो : adobe
निर्जला एकादशी पूजा विधि
  • निर्जला एकादशी के दिन सुबह ही ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर लें।
  • आप इस दिन साफ वस्त्रों को धारण करें और यदि संभव हो, तो पीले रंग के कपड़े पहनें।
  • अब एक चौकी पर भगवान विष्णु की मूर्ति रखें।
  • भगवान को वस्त्र अर्पित करें।

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Nirjala Ekadashi 2025 - फोटो : adobe stock
  • फूल, मिठाई, फल चढ़ाएं।
  • अब शुद्ध देसी घी से दीप जला लें।
  • इसके बाद भगवान विष्णु का स्मरण करें।
  • मंत्रों का जप करें और निर्जला एकादशी व्रत कथा पढ़ें।
  • अंत में प्रभु की आरती करें।
  • ध्यान रखें कि यह निर्जला एकादशी है, इसलिए पूरे दिन पानी ग्रहण न करें।
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Nirjala Ekadashi 2025 - फोटो : adobe stock
विष्णु मूल मंत्र
ॐ नमोः नारायणाय॥

उपरोक्त मंत्र भगवान विष्णु का मूल मंत्र है। इस मंत्र का जाप करने से विष्णु जी अवश्य प्रसन्न होते हैं।

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भगवते वासुदेवाय मंत्र
ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥
श्री विष्णु का जो भी साधक इस मंत्र का जाप करते हुए ध्यान लगाता है उसे भगवत कृपा की प्राप्ति होती है।

विष्णु गायत्री मंत्र
ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥

विष्णु गायत्री मंत्र के जाप से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। 

श्री विष्णु मंत्र 
मंगलम भगवान विष्णुः, मंगलम गरुणध्वजः। मंगलम पुण्डरी काक्षः, मंगलाय तनो हरिः॥
उपरोक्त विष्णु मंत्र जीवन के सभी दुखों को दूर करके जीवन में सुख और समृद्धि प्रदान करता है। 
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Nirjala Ekadashi 2025 - फोटो : अमर उजाला
भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥

तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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