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Mesh Sankranti 2025: 14 या 15 अप्रैल किस दिन है मेष संक्रांति? जानें सही तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि

Fri, 11 Apr 2025 12:20 PM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मेष संक्रांति हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है, जो सौर नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल मेष संक्रांति किस दिन मनाई जाएगी और इसका शुभ मुहूर्त और पूजा विधि क्या है। 
 
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खरमास 2024 - फोटो : Adobe Stock
Mesh Sankranti 2025: मेष संक्रांति हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है, जो सौर नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है। यह पर्व आध्यात्मिक उत्थान, फसल के नए मौसम की शुरुआत और प्रकृति में बदलाव के संकेत के रूप में देखा जाता है।  ज्योतिषीय दृष्टि से यह दिन बेहद खास होता है क्योंकि इस दिन सूर्य देवता मेष राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे सौर वर्ष का पहला दिन माना जाता है। चूंकि मेष राशि बारह राशियों में प्रथम है, इसलिए इसे ज्योतिष में नव चक्र की शुरुआत के रूप में देखा जाता है। इसलिए, कई क्षेत्रों में इसे नववर्ष के रूप में मनाने की परंपरा है। मेष संक्रांति को आत्मिक विकास और भीतरी परिवर्तन के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दौरान सूर्य की ऊर्जा प्रबल होती है, जिससे ध्यान, पूजा, स्नान और दान-पुण्य जैसे कर्मों को करने का विशेष महत्व बताया गया है।

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खरमास 2024 - फोटो : Adobe Stock
मेष संक्रांति 2025 की तिथि
दृक पंचांग के अनुसार इस वर्ष सूर्य 14 अप्रैल, सोमवार को प्रातः 3:30 बजे मेष राशि में प्रवेश करेगा। उदया तिथि के अनुसार, इसी दिन मेष संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा।
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Pooja Thali - फोटो : freepik
पूजा विधि
इस दिन गंगा, यमुना या गोदावरी जैसी पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। अगर आपके लिए नदी में स्नान करना  संभव न हो, तो घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। ऐसा करने से शरीर और मन की शुद्धि मानी जाती है। 

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खरमास 2024 - फोटो : Adobe Stock
इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर एक तांबे के पात्र में जल, लाल पुष्प, गुड़, रोली और अक्षत लेकर सूर्य को अर्घ्य दें। इसके बाद “ॐ सूर्याय नमः” जैसे मंत्रों का उच्चारण करें। साथ ही सूर्य चालीसा या आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ भी किया जा सकता है। पूजा के स्थान को दीप, धूप और पुष्पों से सजाएं और सूर्य देव को भोग लगाकर प्रसाद सभी में बांटें।
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खरमास 2024 - फोटो : Adobe Stock
भारत के विभिन्न हिस्सों में मेष संक्रांति को विविध नामों से जाना जाता है। तमिलनाडु में पुथांडु, केरल में विशु, पंजाब में बैसाखी और ओडिशा में पाना संक्रांति। ये सभी त्योहार नए वर्ष और सूर्य के संक्रमण की खुशी में मनाए जाते हैं। यही वह समय होता है जब सूर्य उत्तरायण से दक्षिणायन की ओर अग्रसर होता है और गर्मी के मौसम की शुरुआत मानी जाती है। यह दिन पुण्य लाभ और दान धर्म की दृष्टि से भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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