विक्रम संवत् 2076 के दस पदाधिकारियों में से तीन पद पर (नीरशेष — धातुओं के स्वामी, धनेश — कोष के स्वामी और शश्येष — चौमासा फसलों के स्वामी) विराजमान पृथ्वी पुत्र मंगल का अस्त होना बड़ी ज्योतिषीय घटना है। मंगल दिनांक 11 जुलाई की मध्य रात्रि 04:36 पर पश्चिम दिशा की ओर अस्त होंगे, जो 23 अक्टूबर को सुबह 06:36 मिनट पर पूर्व में उदय होंगे। इनके अस्त होने से भारतीय व्यापार, मानसून की पैदावार और हीरे जवाहरात और धातुओं के व्यापार पर गहरा असर पड़ेगा।
अस्त होने के मध्य भी मंगल 08 अगस्त की मध्य रात्रि के पश्चात् 04:46 मिनट पर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। जहां पर ये 25 सितंबर की सुबह 06:31 मिनट तक रहेंगे। इसके बाद मंगल कन्या राशि में प्रवेश कर जाएंगे, जहां 10 नवंबर की दोपहर 02:23 मिनट तक रहेंगे।
जाने कैसे मिलेगा धन, प्यार, शादी, नौकरी व व्यापार जैसी समस्याओं का समाधान मात्र 99 रुपये में
कोई भी ग्रह जब वह अस्त हो जाता है, तो तेजहीन रहता है, अर्थात् उसका नेचुरल पावर उस मात्रा में नहीं रहता, जिसके लिए वह जाना जाता है। मेदिनी ज्योतिष के अनुसार मंगल का अस्त होना भारतवर्ष के लिए कुछ मामलों में बेहतर सिद्ध होगा, जैसे स्वतंत्र भारत की कुंडली का मारकेश मंगल है तो मारकेश का अस्त होना देश के लिए शुभ साबित होगा। सभी 12 राशियों पर मंगल के अस्त होने का प्रभाव जानने के लिए आगे की स्लाइड क्लिक करें —