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अपरा एकादशी क्यों कहलाती है भद्रकाली एकादशी, जानें महत्व और पूजा विधि

Sun, 10 May 2026 12:07 AM IST
Shweta Singh ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

अपरा एकादशी 13 मई 2026 को मनाई जाएगी, जो अपार धन और सुख-समृद्धि देने वाली मानी जाती है। जानें इस व्रत का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पौराणिक कथा, जो सोई हुई किस्मत को जगाने में सहायक होती है।
 
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एकादशी तिथि 12 मई को दोपहर 2:52 बजे प्रारंभ होकर 13 मई को दोपहर 1:29 बजे समाप्त होगी। - फोटो : अमर उजाला AI
Apara Ekadashi: हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अपरा एकादशी कहा जाता है, जिसे अचला एकादशी भी कहा जाता है। इस वर्ष यह पावन व्रत 13 मई 2026 को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु तथा मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 12 मई को दोपहर 2:52 बजे प्रारंभ होकर 13 मई को दोपहर 1:29 बजे समाप्त होगी, लेकिन उदया तिथि के अनुसार व्रत 13 मई को रखा जाएगा। यह व्रत कष्टों से मुक्ति और शुभ फल प्रदान करने वाला माना जाता है।
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इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर भगवान विष्णु शीघ्र प्रसन्न होते हैं - फोटो : adobe stock
क्यों है ये एकादशी खास? 
हिंदू धर्म में अपरा एकादशी को अत्यंत शुभ और फलदायी व्रत माना गया है जो विशेष रूप से भगवान विष्णु की आराधना के लिए समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर भगवान विष्णु शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों के जीवन में सुख-समृद्धि, उन्नति और मानसिक शांति का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। इस व्रत का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक भी माना जाता है क्योंकि इसे करने से जीवन के कष्ट दूर होने और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होने की मान्यता है। अपरा शब्द का अर्थ असीमित या अपार होता है इसलिए इस एकादशी को अपरा एकादशी कहा जाता है।
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अपरा एकादशी को भद्रकाली एकादशी के रूप में मनाया जाता है। - फोटो : Adobe Stock
भद्रकाली और जलक्रीड़ा एकादशी 
ब्रह्म पुराण में अपरा एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है और इसे अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना गया है। यह व्रत पूरे भारत में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है, लेकिन विभिन्न क्षेत्रों में इसे अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ देखा जाता है। पंजाब, जम्मू-कश्मीर और हरियाणा में अपरा एकादशी को भद्रकाली एकादशी के रूप में मनाया जाता है। जहां इस दिन देवी भद्रकाली की पूजा-अर्चना करना अत्यंत शुभ माना जाता है। वहीं ओडिशा में इसे जलक्रीड़ा एकादशी कहा जाता है और इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ की भक्ति और आराधना की जाती है। इस प्रकार यह एकादशी अलग-अलग रूपों में देशभर में श्रद्धा और भक्ति का संदेश देती है।

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अपरा एकादशी तिथि - फोटो : Adobe Stock
अपरा एकादशी तिथि
  • ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि आरंभ:  12 मई, दोपहर 2: 52 मिनट पर
  • ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि समाप्त: 13 मई,दोपहर 1:29 मिनट पर
  • उदयातिथि के अनुसार अपरा एकादशी का व्रत 13 मई 2026 को रखा जाएगा। 
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एकादशी के दिन चावल और जड़ वाली सब्जियों का सेवन न करें। - फोटो : Adobe Stock
न करें ये गलतियां
  • तामसिक भोजन और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
  • दिन की शुरुआत बिना भगवान विष्णु की भक्ति किए न करें।
  • पूरे दिन मन को ईश्वर भक्ति और ध्यान में लगाएं।
  • एकादशी के दिन चावल और जड़ वाली सब्जियों का सेवन न करें।
  • बाल और नाखून काटने से बचें।
  • सुबह देर तक सोने की आदत न रखें और जल्दी उठें।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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