वैदिक पंचांग के अनुसार, 31 अक्तूबर 2026 को देवगुरु बृहस्पति कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में गोचर करेंगे। आपको बता दें देवगुरु इस समय अतिचारी हैं और आने वाले वर्षों में भी अतिचारी अवस्था में रहेंगे। गुरु सिंह राशि में 25 जनवरी तक रहेंगे, फिर इसके बाद उल्टी चाल से चलते हुए वापस कर्क राशि में आ जाएंगे। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में गुरु को ज्ञान, धन, शिक्षा, भाग्य, विवाह, विस्तार और संतान का कारक माना जाता है। सिंह राशि में गुरु के प्रवेश करने से 31 अक्तूबर के बाद कई राशियों के करियर, कारोबार और आर्थिक मामलों में महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आ सकता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, गुरु का सिंह राशि में गोचर से अपने मित्र सूर्य के घर प्रवेश करेंगे जिससे नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, पद-प्रतिष्ठा और रचनात्मकता में वृद्धि होगी। गुरु के सिंह राशि में गोचर करने से करियर और आर्थिक मामलों में तरक्की मिलने के संकेत होते हैं। गुरु के सिंह राशि में गोचर करने से कुछ राशि वालों को बहुत ज्यादा लाभ मिलने के योग हैं। आइए जानते हैं कौन-कौन सी हैं राशियां।