जीव कारक गुरु अपनी ही राशि मीन में 28 मार्च को अस्त हो जाएंगे। इसके बाद वो अस्त अवस्था में ही 22 अप्रैल को मेष राशि में प्रवेश कर 27 अप्रैल को उदय होंगे। गुरु ज्योतिष में विवाह, धार्मिक कार्य के कारक माने गए है इसलिए जब गुरु अस्त हो जाते है तो कोई भी मांगलिक काम नहीं होता। गुरु अस्त होकर अपना प्रभाव न्यून कर देते है इसलिए गुरु का अस्त होना 12 राशियों पर प्रभाव डालेगा। आइये जानते है कि 12 राशियों पर इसका क्या प्रभाव होगा।
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मेष राशि - इस राशि के जातकों के लिए गुरु नवम और द्वादश भाव के स्वामी होकर द्वादश भाव में ही अस्त होंगे। इस भाव में अस्त होने के कारण आपको पिता के सुख में कुछ कमी महसूस हो सकती है। इस समय आपको व्यर्थ की यात्राओं पर भी जाना पड़ सकता है। इस समय आपका भाग्य आपका कम साथ देगा। कार्य स्थल पर आपको अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। इस समय आपको अपने प्रयासों का उचित परिणाम प्राप्त नहीं होगा। आपको इस समय स्वास्थ्य का ध्यान भी रखना है।
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वृष राशि- इस राशि के लिए गुरु आठवें और एकादश भाव के स्वामी होते हैं और अब वो आपके एकादश भाव में ही अस्त होंगे। इस भाव में गुरु के अस्त होने से आपको अच्छे और बुरे दोनों परिणाम मिलने वाले हैं। एक तरफ आपके स्वास्थ्य में आपको सुधार दिखाई देगा वही दूसरी ओर आपको आर्थिक परेशानी का भी सामना कर पड़ सकता है। इस दौरान आपको सलाह दी जाती है कि आप अपने खर्च में थोड़ी कमी कर दें। इस समय आपको अपने मित्रों और भाइयों से उचित मदद नहीं मिलेगी।
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मिथुन राशि - इस राशि के लिए गुरु सप्तम और दशम भाव के स्वामी होकर अब दशम भाव में ही अस्त होंगे। इस भाव में गुरु के अस्त होने से आपकी उन्नति पर ग्रहण लग सकता है। इस समय आपको अपने कार्यस्थल पर और अधिक मेहनत करने की आवश्यकता होगी। इस समय आपके शत्रु आपके खिलाफ सक्रिय होकर साजिश करने की कोशिश करेंगे। इस गोचर काल में आपको यह सलाह दी जाती है कि आप किसी भी मित्र पर विश्वास न करे। गुरु के अस्त गोचर काल में आपको वैवाहिक जीवन में कुछ समस्या आ सकती है।
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कर्क राशि - इस राशि के लिए गुरु छठे और नवम भाव के स्वामी होते हैं और अब वो आपके नवम भाव में ही अस्त होंगे। इस समय आपके दुश्मन बेनकाब होंगे। अगर आप किसी नई नौकरी की कामना रखते है तो वो अब पूरी हो सकती है। इस समय आपको भाग्य को लेकर थोड़ी कठिनाई आ सकती है। आपको अपने पिता का सहयोग नहीं मिलेगा जिससे आपका मन खिन्न रहने वाला है। इस समय आपको क्रोध से बचकर रहने की सलाह दी जाती है।
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सिंह राशि - इस राशि के जातकों के लिए गुरु पंचम और अष्टम भाव के स्वामी होते हैं। इस समय गुरु आपके अष्टम भाव में अस्त होंगे। इस भाव में गुरु के अस्त होने से आपकी धार्मिक दिनचर्या पर असर पड़ सकता है। परिवार में कलह के साथ ही आलस्य भी बढ़ सकता है। इस समय ससुराल पक्ष से किसी भी प्रकार का कोई लेनदेन नहीं करे। प्रेम प्रसंग में असफलता हाथ लगने से आपका मन खिन्न रहने वाला है। इस समय छात्र वर्ग को पढ़ाई में थोड़ी तकलीफ महसूस होगी।
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कन्या राशि - इस राशि के जातकों के लिए गुरु चौथे और सप्तम भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव में ही अस्त होंगे। इस भाव में गुरु के अस्त होने से परिवार में कलह और मानसिक तनाव संभव है। इस समय आप अपनी मां के स्वास्थ्य को लेकर भी परेशान हो सकते हैं। इस गोचर काल के दौरान आपको सलाह दी जाती है कि कार्य स्थल पर अपनी छवि को अच्छी बनाये रखे। इस समय आपके उच्च अधिकार आपको एक नया लक्ष्य प्रदान करेंगे जिसे आप प्राप्त करेंगे।
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तुला राशि - इस राशि के जातकों के लिए गुरु तीसरे और छठे भाव के स्वामी होते हैं। इस समय गुरु ग्रह आपके छठे भाव में ही अस्त होंगे। इस गोचर के दौरान आप अपने शत्रुओं का पूर्ण रूप से दमन करने में सफल होंगे। ब्याज और शेयर मार्किट का काम करने वाले जातकों को इस दौरान फायदा होने की सम्भावना है। हालांकि आपको अपने भाई बहनों के साथ किसी भी प्रकार का विवाद नहीं करना है। जब आप यात्रा पर जाए तो अपने सामान की देखरेख अच्छे से करे वो खो सकता है।
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वृश्चिक राशि- इस राशि के जातकों के लिए गुरु दूसरे और पंचम भाव के स्वामी होते हैं। इस समय देव गुरु आपके पंचम भाव में ही अस्त होंगे। इस दौरान आपको प्रेम प्रसंग में सावधानी रखनी होगी। इस समय आपके ऊपर कोई आरोप भी लग सकता है। संतान पक्ष को लेकर चिंता हो सकती है। परिवार के लोगों का सहयोग नहीं मिलने के कारण क्रोध आ सकता है। इस समय अपनी वाणी को कठोर होने से रोकना होगा। किसी भी प्रकार के निवेश करने से पहले जांच ले।
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धनु राशि - इस राशि के जातकों के लिए गुरु लग्न और चौथे भाव के स्वामी होते हैं। इस समय देव गुरु आपके चौथे ही भाव में अस्त होंगे। इस दौरान आपको थोड़ी पारिवारिक समस्या से दो चार होना पड़ेगा। इस समय आपको अपने परिवार के किसी सदस्य की सेहत पर धन खर्च करना पड़ सकता है। इस दौरान आप थोड़ी थकान महसूस करेंगे। आपकी सामाजिक प्रतिष्ठा पर चोट पहुँचाने के लिए आपके शत्रु इस समय काम करेंगे। इस समय आपको यह सलाह दी जाती है कि अपने मन की बात किसी से नहीं कहे।
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मकर राशि- इस राशि के जातकों के लिए गुरु तीसरे और बारहवें भाव के स्वामी होते हैं। और इस समय गुरु देव आपके तीसरे भाव में अस्त होंगे। इस गोचर के दौरान आपके अंदर साहस की कमी देखी जा सकती है। इस दौरान आपकी कुछ व्यर्थ यात्राएं होगी जिनसे आपको कोई ख़ास लाभ नहीं होगा। इस गोचर काल के दौरान आपको सलाह दी जाती है कि आप किसी भी प्रकार का कोई आर्थिक लेनदेन अपने भाइयो से नहीं करे। इस समय विदेश में काम कर रहे जातक थोड़ा परेशान हो सकते है।
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कुंभ राशि- इस राशि के जातकों के लिए गुरु दूसरे और एकादश भाव के स्वामी होते हैं। इस समय गुरु आपके दूसरे भाव यानी वाणी एवं कुटुंब भाव में अस्त होंगे। इस भाव में गुरु के अस्त होने से आपकी वाणी में थोड़ी कठोरता आ सकती है। इस दौरान आपको यह सलाह दी जाती है कि आप किसी भी प्रकार के बड़े खर्च न होने दें। इस समय आपको वाहन भी सावधानी से चलाना है। परिवार में किसी मांगलिक कार्य का आयोजन करवा सकते हैं। विवाहित जातक अपने परिवार को लेकर बाहर घूमने जा सकते है।
मीन राशि - इस राशि के जातकों के लिए गुरु लग्न और दशम भाव के स्वामी होते हैं। इस समय गुरु आपके लग्न में ही अस्त होने जा रहे हैं। इस दौरान लग्नेश का लग्न में ही अस्त होने स्वास्थ्य के लिहाज से ठीक नहीं है। किडनी और लीवर के जो मरीज है उन्हें नियमित रूप से चैकअप करवाने की जरूरत है। इस दौरान कार्य स्थल आपको अनेक समस्या आ सकती है। किसी सहकर्मी के साथ हो रहा विवाद किसी बड़ी घटना का रूप ले सकता है। इस समय अपने क्रोध पर काबू रखे। यह भी पढ़ें-