नौ ग्रह
यदि जातक की कुंडली में कोई भी शुभ ग्रह जैसे बृहस्पति, शुक्र, चंद्र, बुध आदि अस्त हों तो और भी भयानक परिणाम हो सकते हैं। अस्त ग्रहों की दशा-अंतर्दशा की स्थिति में जातक को बीमारी, गंभीर दुर्घटना कोई भयानक दुःख आदि हो सकते हैं। कई कुंडलियों में तो देखने को मिलता है कि किसी एक ही शुभ ग्रह के अस्त होने पर जातक का जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है, ऐसी स्थिति में उसके साथ कुछ भी घटित हो सकता है जिसका परिणाम अत्यधिक दुखदायी हो जैसे किसी प्रियजन की मृत्यु , दुर्घटना में कोई अंग-भंग होना, किसी भी योजना के असफल होने पर धन का अत्यधिक अभाव होना, पूर्वजों की संपत्ति का नष्ट होना आदि हो सकते हैं। यदि कोई ग्रह अस्त हो लेकिन शुभ स्थान पर स्थित हो और किसी शुभ ग्रह के प्रभाव में हो तो उसके परिणामों में कुछ हद तक कमी आ सकती है, लेकिन यदि अस्त ग्रह किसी अशुभ ग्रह या दूषित ग्रह की छाया में हो तो परिणाम काफी दुष्कर हो सकते हैं।
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