मार्च के तीसरे सप्ताह में कांग्रेस के 9 विधायकों के बगावत के बाद उत्तराखंड में हरीश रावत की सरकार संकट से जूझ रही थी। बीजेपी ने प्रदेश में राष्ट्रपति शासन भी लगवा दी थी और बार-बार सरकार बनने में बाधा डाल रही थी लेकिन न्यायालय के हस्तक्षेप से अब मामले को सुलझा लिया गया है। अब यह बात साफ हो चुकी है कि हरीश रावत के नेतृत्व में उत्तराखंड में फिर से सरकार का गठन होगा।
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हरीश रावत की फिर बनेगी सरकार, ये है जीत की 5 वजह
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हरीश रावत
- फोटो : pti
हरीश रावत को इन दिनों क्यों संकट से जूझना पड़ा और किस तरह फिर से वापस सत्ता में लौट रहे हैं इस विषय पर ज्योतिषशास्त्री सचिन मल्होत्रा के आंकलन कई बड़े राज से पर्दा हटा रहे हैं।
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हरीश रावत की फिर बनेगी सरकार, ये है जीत की 5 वजह
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हरीश रावत
- फोटो : amar ujala
हरीश रावत का जन्म 27 अप्रैल 1947 को दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर अल्मोड़ा जिले में हुआ था। कर्क लग्न की इनकी कुंडली में लग्न में शनि और चन्द्रमा का विष योग बन हुआ है जो इन्हें जब-तब मुश्किलों में डाले रखता है। साल 2012 में मार्च महीनें में हुए उत्तराखंड विधानसभा चुनावों के बाद मुख्यमंत्री न बनाए जाने से नाराज होकर इन्होंने अपनी पार्टी से बगावत कर दी थी जिसे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने तब बड़ी मुश्किल से संभाला था। हरीश रावत की कुंडली में दशम भाव में उच्च के सूर्य विराजमान हैं जो इन्हें आसानी से हार न मानने वाला तेजस्वी राजनेता बनाते हैं। तमाम मुश्किलों के बाद फरवरी 2014 में यह सूर्य में शुक्र की विंशोत्तरी दशा में पहली बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।
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हरीश रावत
- फोटो : file photo
साल 2016 के मार्च महीने में चन्द्र-राहु-शनि की विंशोत्तरी दशा के दौरान उनकी ही पार्टी के नेताओं ने उनके विरुद्ध बगावत कर दी। इससे समय गुरु वक्री चल रहे थे। लेकिन जैसे ही 9 मई को वक्री चल रहे गुरु मार्गी हुए तो उनको थोड़ी राहत मिली। गुरु हरीश रावत की कुंडली में नवम भाव के स्वामी हैं। नवम स्थान भाग्य स्थान और न्याय का स्थान भी है और उच्च अदालत का प्रतिनिधत्व करता है। गुरु वर्तमान गोचर में सिंह राशि में हो कर उनके जन्म और चन्द्र लग्न से सत्ता स्थान यानी दशम भाव को देख रहा है।
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हरीश रावत की मुश्किलें अब कम होंगी और अगले कुछ समय में वह स्वयं राज्यपाल को विधानसभा भंग कर चुनाव करवाने की सिफारिश भेज कर अपने विरोधियों को एक और झटका दे सकते हैं। हरीश रावत की कुंडली में नवम भाव में बन रहा बुध, मंगल और शुक्र का योग पंचम भाव में पड़े गुरु से दृष्ट है जो की उनको भाग्यवान बनाता है और विरोधियों पर जीत को दर्शा रहा है।
आइये अब देखें हरीश रावत की जीत की पांच बड़ी वजह
गुरु वक्री थे तब नियमों को ताक पर रखकर सरकार को भंग किया गया। और गुरु जैसे ही मार्गी हुए हैं परिस्थितियों ने इनका साथ दिया और फिर से इनकी सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया है।
दूसरी ओर भाजपा इन दिनों गुरु चांडाल योग से गुजर रही है जिसकी वजह से उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा और इनकी किरकिरी भी हुई।
हरीश रावत की कुंडली में नवम भाव में बन रहा बुध, मंगल और शुक्र का योग पंचम भाव में पड़े गुरु से दृष्ट है जो की उनको भाग्यवान बना रहा है।
सत्ता स्थान का स्वामी सूर्य इनकी कुण्डली में दसम भाव में बैठा है जो इन्हें आसानी से हारने नहीं देता है और विरोधियों पर जीत की ताकत देता है।
गुरु की शुभ दृष्टि सत्ता स्थान पर है जिसने इन्हें वापस सत्ता में लाने का काम किया है। यानी हरीश रावत की सत्ता में वापसी के लिए सबसे बड़ा कारण गुरु हैं।