गुरु आदित्य योग
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गुरु आदित्य योग का ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य और बृहस्पति एक ही राशि में एक साथ आते हैं या एक-दूसरे पर दृष्टि डालते हैं, तब गुरु आदित्य योग का निर्माण होता है। इस योग को अत्यंत शुभ और प्रभावशाली माना गया है।
यह योग जिस व्यक्ति की कुंडली में बनता है, उसे जीवन में ज्ञान, धन, यश, मान-सम्मान, और वैवाहिक तथा पारिवारिक सुख प्राप्त होता है। साथ ही संतान सुख, निर्णय क्षमता और समाज में विशेष पहचान मिलने के योग भी प्रबल होते हैं।
गुरु-आदित्य योग को राजयोग की श्रेणी में रखा जाता है, क्योंकि यह योग व्यक्ति को नेतृत्व के गुण, प्रभावशाली व्यक्तित्व, और उच्च पदों की ओर ले जाता है। यह योग राजनीतिक, प्रशासनिक, शिक्षा और धर्म से जुड़े क्षेत्रों में विशेष सफलता देने वाला माना जाता है। यदि यह योग गोचर में किसी जातक की जन्म कुंडली की अनुकूल भावों में बन रहा हो, तो उस व्यक्ति के लिए यह समय बहुत लाभकारी सिद्ध हो सकता है। यह योग भाग्य को बल देता है और रुके हुए कार्यों में गति लाता है।
इस योग का असर हर किसी की कुंडली पर पड़ेगा, लेकिन कुछ राशियों के लिए यह समय खासतौर पर शुभ रहेगा। करियर से लेकर रिश्तों तक, हर क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद की जा सकती है। आइए जानते हैं, किन 7 राशियों को मिलेगा इस दुर्लभ योग का सबसे ज़्यादा लाभ।