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Bhado Purnima: क्या चंद्र ग्रहण के साथ रख सकते हैं पूर्णिमा का व्रत? जानें सही नियम

Fri, 05 Sep 2025 03:29 PM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सितंबर में पूर्णिमा व्रत 7 सितंबर, रविवार को रखा जाएगा। खास बात ये है कि इसी दिन चंद्र ग्रहण भी लगने जा रहा है। आइए जानते हैं कि इस दिन व्रत रखना शुभ रहेगा या नहीं।
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पूर्णिमा व्रत और चंद्र ग्रहण 2025 - फोटो : Freepik
Purnima Vrat and Chandra Grahan 2025: हिंदू धर्म में पूर्णिमा व्रत को शुभ और फलदायी माना जाता है। इस दिन सत्यनारायण भगवान की पूजा करके सुख-समृद्धि, धन-धान्य और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। सितंबर में यह व्रत 7 सितंबर, रविवार को रखा जाएगा। खास बात ये है कि इसी दिन यानी भाद्रपद माह की पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण भी लगने जा रहा है। भादो पूर्णिमा की तिथि का आरंभ 7 सितंबर, रविवार को सुबह 09:27 बजे होगा और इसका समापन 8 सितंबर, सोमवार को सुबह 07:30 बजे होगा। इसी आधार पर भादो पूर्णिमा का व्रत 7 सितंबर 2025 को रखा जाएगा।

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पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण का संयोग - फोटो : adobe stock
पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण का संयोग
7 सितंबर की रात को चंद्र ग्रहण भी लगने जा रहे है। यह ग्रहण रात 9 बजकर 58 मिनट से लेकर देर रात 1 बजकर 26 मिनट तक बना रहेगा। इसकी कुल अवधि 3 घंटे 29 मिनट तक होगी। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या पूर्णिमा का व्रत ग्रहण के साथ रखा जा सकता है? आइए जानते हैं कि इस दिन व्रत रखना शुभ रहेगा या नहीं।

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पूर्णिमा पर व्रत रखना शुभ है या नहीं? - फोटो : adobe stock
पूर्णिमा पर व्रत रखना शुभ है या नहीं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत तो रखा जा सकता है, लेकिन ग्रहण और सूतक काल में पूजा-पाठ नहीं करना चाहिए। पूर्णिमा तिथि पर व्रत का संकल्प ग्रहण शुरू होने से पहले लें। साथ ही पूजा-पाठ और कथा ग्रहण समाप्त होने के बाद ही करें। ग्रहण के बाद गंगाजल का छिड़काव करके शुद्धि करें और फिर भगवान सत्यनारायण की पूजा करें।

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पूर्णिमा पर व्रत रखना शुभ है या नहीं? - फोटो : adobe
सूतक काल ग्रहण आरंभ होने से लगभग 9 घंटे पहले लग जाता है। इस दौरान पूजा नहीं की जाती है न ही धार्मिक कार्य किए जाते हैं। इस बार सूतक 7 सितंबर को दोपहर से शुरू होकर 8 सितंबर की तड़के 1:26 AM तक चलेगा। इसलिए ग्रहण के साथ व्रत रखना शुभ माना जाता है, लेकिन पूजा ग्रहण के बाद ही करनी चाहिए। 

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पूर्णिमा व्रत की विधि - फोटो : freepik
पूर्णिमा व्रत की विधि
प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु की प्रतिमा को स्थापित करें। गंगाजल से शुद्धि कर दीप जलाएं और कलश स्थापना करें। भगवान को पुष्प, अक्षत, तुलसीदल, फल अर्पित करें। इसके बाद पंचामृत से अभिषेक कर सत्यनारायण व्रत कथा का पाठ करें और आरती करें। व्रत के दिन फलाहार करें और अगले दिन पारण के बाद भोजन ग्रहण करें।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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