वैदिक ज्योतिष शास्त्र के नियम के अनुसार जो ग्रह हैं वह निरंतर गतिमान होते रहते हैं। हम सब इस बात को जानते हैं कि जो 9 ग्रह हैं वह 12 राशियों में गोचर करते हैं और अलग-अलग राशियों में अलग-अलग परिणाम देते हैं। कुछ राशियों में ग्रह बहुत अच्छे परिणाम देते हैं तो कुछ में बुरे परिणाम देते हैं और इसी आधार पर हमारे ऋषि-मुनियों ने ग्रहों की उच्च राशि, नीच राशि, मूल त्रिकोण राशि, स्वराशि ,शत्रु राशि, मित्र राशि आदि राशियों का वर्गीकरण किया। अगर हम शनि की बात करें तो शनि मेष राशि में नीच के हो जाते हैं यानी कि अच्छे परिणाम नहीं देते लेकिन मंगल शनिदेव की राशि मकर में आकर के उच्च के हो जाते हैं तो आखिरकार यह रहस्य क्या है? आज इस लेख में हम आपको इस रहस्य को समझाते हैं।