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हथेली में हैं ये निशान तो, जीवन भर करेंगे मौज

Mon, 02 Apr 2018 04:14 PM IST
राकेश्ा झा/टीम डिजिटल
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हस्तरेखा
हस्तरेखा विज्ञान में हथेली और शरीर पर मौजूद कई निशानों का जिक्र किया गया है। कुछ चिन्हों को समुद्रशास्त्र में अशुभ माना गया है तो कुछ को शुभ कहा गया है। यहां हम कुछ ऐसे शुभ चिन्हों की बात कर रहे हैं जो आपके अंगों पर मौजूद हैं तो समझ लीजिए कि आप जीवन भर मौज करने वाले हैं।
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हथेली में हैं ये निशान तो, जीवन भर करेंगे मौज

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त्रिभ्ाुज
आपकी हथेली में कुछ रेखाओं से मिलकर त्रिभुज का चिन्ह बन रहा है तो इसका मतलब है कि आप भाग्यशाली और उदार प्रवृति के व्यक्ति होंगे। आपका समाज में मान-सम्मान होगा। जीवन में सभी प्रकार के भौतिक सुख प्राप्त करेंगे।
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त्रिभ्ाुज
हथेली में अगर बड़ा त्रिभुज है और उसके मध्य अन्य त्रिभुज की आकृति दिखती है तो यह सूचक है कि आप उच्च पद प्राप्त करेंगे, यानी आप जिस क्षेत्र में काम करते हैं उस क्षेत्र में काफी उन्नति करेंगे।

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एम रेखा
हथेली में अंग्रेजी का एम चिह्न बन रहा है तो यह आपके पास धन की कभी कमी नहीं रहने का सूचक है। आपको जरुरत के समय कभी धन की कमी का सामना नहीं करना होगा।
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त्रिभ्ाुज
आपकी हथेली के बीच में त्रिभुज का चिह्न है तो आप अपनी योग्यता, मेहनत और लगनशीलता से जीवन में कामयाब होंगे।
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हस्तरेखा
हथेली में नक्षत्र का निशान बहुत ही शुभ माना गया है। यह जिनकी हथेली में होता है वह सुखी संपन्न होते हैं। ऐसे व्यक्ति उच्च पद और प्रतिष्ठा प्राप्त करते हैं।
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खिचड़ी
मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी दान और खान की परंपरा के पीछे भगवान शिव के अवतार कहे जाने वाले बाबा गोरखनाथ की कहानी है। खिलजी के आक्रमण के समय नाथ योगियों को खिलजी से संघर्ष के कारण भोजन बनाने का समय नहीं मिल पाता था। इससे योगी अक्सर भूखे रह जाते थे और कमजोर हो रहे थे। इस समस्या का हल निकालने के लिए बाबा गोरखनाथ ने दाल, चावल और सब्जी को एक साथ पकाने की सलाह दी। यह व्यंजन काफी पौष्टिक और स्वादिष्ट था। इससे शरीर को तुरंत उर्जा मिलती थी। नाथ योगियों को यह व्यंजन काफी पसंद आया। बाबा गोरखनाथ ने इस व्यंजन का नाम खिचड़ी रखा। गोरखपुर स्थिति बाबा गोरखनाथ के मंदिर के पास मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी मेला आरंभ होता है। कई दिनों तक चलने वाले इस मेले में बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी का भोग लगाया जाता है और इसे भी प्रसाद रूप में वितरित किया जाता है।
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शनि
खिचड़ी दान और भोजन के पीछे एक कारण यह है कि संक्रांति के समय नया चावल तैयार हो जाता है। माना जाता है कि सूर्य देव ही सभी अन्न को पकाते हैं और उन्हें पोषित करते हैं इसलिए आभार व्यक्त करने के लिए सूर्य देव को गुड़ से बनी खीर या खिचड़ी अर्पित करते हैं। वैसे मकर संक्रांति के दिन बनाई जाने वाली खिचड़ी में उड़द का दाल प्रयोग किया जाता है जो शनि से संबंधित है। कहते हैं इस दिन विशेष खिचड़ी को खाने से शनि का कोप दूर होता है। इसलिए खिचड़ी खाने की परंपरा है।
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