कृष्ण जन्म के दौरान 8 अंक का जो संयोग बना उसमें कई रहस्य छुपे हैं। श्री कृष्ण का जन्म रात्रि के सात मुहूर्त निकलने के बाद आठवें मुहूर्त में हुआ। तब रोहिणी नक्षत्र तथा अष्टमी तिथि थी जिसके संयोग से जयंती नामक योग बन रहा था।
8 मूलांक की विशेषता
जिन व्यक्तियों का जन्म किसी भी माह की 8,17 या 26 तारीख को होता हैं, वे इस मूलांक के अंतर्गत आते हैं। मूलांक 8 का स्वामी ग्रह शनि हैं। ज्योतिषशास्त्र में शनि को पाप ग्रह कहा गया है लेकिन, भाग्य को सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाला ग्रह भी यही है। शनि की स्थित अनुकूल हो तो व्यक्ति को भाग्य का सहयोग हमेशा मिलता रहता है। इस मूलांक वाले लोग सफलता अर्जित करते हैं। इस मूलांक के व्यक्ति प्रायः अन्तर्मुखी प्रवृति के होते है, ये लोग प्रचार-प्रसार से दूर एकनिष्ठ होकर अपने कामो में लगे रहते हैं ये लोग दुनिया के लिए महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। इस अंक वाले व्यक्ति या तो अत्यंत सफल होते है या अत्यंत असफल।