Ketu Transit 2022: राहु और केतु छाया ग्रह माने जाते हैं लेकिन फिर भी इनका गोचर बहुत से शुभ और अशुभ परिणाम लेकर आता है। बात करें केतु ग्रह की तो केतु को प्रभाव का ग्रह कहा जाता है, यह किसी भी जातक को स्वयं कोई भी स्वतंत्र परिणाम नहीं देता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार यह माना जाता है कि केतु किसी भी जातक की कुंडली के जिस भाव में स्थित होता है, जातक को उस भाव के स्वामी के अनुरूप ही फल देता है। साथ ही, किसी जातक की जन्म कुंडली में केतु का प्रभाव अन्य सात ग्रहों यानी कि सूर्य, चंद्रमा, मंगल, शनि, शुक्र, बृहस्पति और बुध की युति और दृष्टि पर निर्भर करता है। केतु अन्य ग्रहों की ही तरह अपनी दशा अवधि में जातकों को परिणाम देता है। इस ग्रह को अलगाव का ग्रह भी माना जाता है क्योंकि इसके प्रभाव में जातक सांसारिक सुखों से मोह भंग होने लगता है। केतु वृश्चिक राशि से 12 अप्रैल, 2022 को सुबह 11:18 बजे पर शुक्र के आधिपत्य वाली राशि तुला में गोचर करेगा। आइए जानते हैं केतु का गोचर किन राशि के जातकों के लिए शुभ साबित हो सकता है।