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Rashi Ke Anusar Yoga: अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर अपनी राशि के अनुसार करें योग, चमक जाएगी किस्मत

Tue, 21 Jun 2022 02:45 PM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Rashi Ke Anusar Yoga - फोटो : istock
Rashi Ke Anusar Yoga: दुनियाभर में योग के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। आज मंगलवार के दिन दुनियाभर में 8वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है। जीवन में ऊर्जा और गति को बढ़ावा देने के लिए भरपूर मात्रा में खेलकूद एवं कसरत, योगा, मार्शल आर्ट आदि सीखना जरूरी है। लेकिन अगर मनुष्य अपनी- अपनी राशि के अनुकूल योगा एवं व्यायाम करें तो शरीर को जल्द लाभ तो होगा ही इसका जीवन में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और भाग्योदय भी होगा। क्योंकि स्वस्थ तन और मन भाग्य व भविष्य को संवारने वाले साबित होते हैं। जीवन में थोड़ा सा बदलाव लाकर बड़ा लाभ लिया जा सकता है। ज्योतिषविदों के अनुसार राशि के अनुकूल योग करने की सलाह सभी को दी है। ज्योतिष के अनुसार, हर राशि, शरीर के विभिन्न हिस्सों का प्रतीक है। इसलिए ग्रहों के प्रभाव का अनुमान लगाते हुए शरीर के हर अंग के लिए योगासन भी बताए गए हैं। आइए अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर जानते हैं कि किन राशि के जातकों के लिए कौन सा आसान सही होगा। 
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Rashi Ke Anusar Yoga - फोटो : Istock
मेष राशि
मेष राशि के स्वामी ग्रह मंगल हैं। और मेष लग्न भाव का स्वामी है। इस राशि का कारक तत्व अग्नि है और इसका गुण मूल है। इस आधार पर देखा जाए तो मेष राशि के जातक बहुत ऊर्जा और उत्साह से भरे हुए होते हैं। ज्योतिषविदों के अनुसार, मेष राशि के स्वामी मंगल को युद्ध और उत्साह का देवता माना जाता है। मेष राशि के इन्हीं गुणों के कारण इस राशि वालों के लिए वीरभद्रासन सर्वश्रेष्ठ है। इस आसन को खड़े रहकर किया जाता है। इस आसन को करने के लिए एकाग्रता और पक्के इरादे की जरूरत होती है। इस आसन को करने से शरीर में स्थिरता और संतुलन बढ़ता है। अपने स्वभाव के कारण  मेष राशि के जातकों में बहुत ज्यादा मानसिक श्रम की प्रवृत्ति होती है जिस वजह से उन्हें तनाव, सिरदर्द जैसी समस्याएं होती है । इसीलिए उन्हें वीरभद्रासन के साथ अधोमुख श्वानासन करने की सलाह भी दी जाती है। 
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Rashi Ke Anusar Yoga - फोटो : istock
वृषभ राशि 
वृषभ राशि के स्वामी ग्रह शुक्र हैं। और वह स्वयं द्वितीय भाव यानि धन भाव के स्वामी है। इनका कारक तत्व पृथ्वी है और यह स्थिर गुण वाले हैं। इसके आधार पर वृष राशि के जातक अपने राशि चिह्न बैल की तरह ही जिद्दी और हठीले होते हैं। इस राशि के जातक अपने जीवन में शांति और सुख-सुविधाएं तलाशते हैं। वृष राशि के जातकों को वृक्षासन करने की सलाह दी जाती है। वृक्षासन करने से जांघें, कंधे, पिंडली और पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। वृक्षासन करने से तंत्रिका तंत्र के विकार दूर होते हैं और शरीर में चेतना भी बढ़ती है।

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Rashi Ke Anusar Yoga - फोटो : social media
मिथुन राशि 
मिथुन राशि के स्वामी ग्रह बुध हैं और वह स्वयं तृतीय भाव यानि पराक्रम भाव के स्वामी है। इनका कारक तत्व वायु है और गुण की बात करें तो यह चर  गुण वाले हैं।  मिथुन राशि के जातक साफ दिल के, अविष्कारक, तेज दिमाग वाले और मेधावी होते हैं। मिथुन राशि के जातकों को विशेषतौर पर ये सलाह दी जाती है कि वे अपने श्वसन तंत्र का विशेष ध्यान रखें। इस राशि के जातकों के लिए कई योग आचार्य अक्सर हलासन को सर्वश्रेष्ठ मानते हैं। इस योगासन में शरीर हल की मु्द्रा में आ जाता है। हलासन से रीढ़ की हड्डी में लचीलापन बढ़ने के साथ ही तंत्रिका तंत्र को भी आराम मिलता है। हलासन करने से तनाव दूर होता है और भूख बढ़ती है। हलासन से पाचनतंत्र बेहतर होती है और अच्छी नींद आती है।
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Rashi Ke Anusar Yoga - फोटो : istock
कर्क राशि 
कर्क राशि के स्वामी ग्रह चंद्रमा है और यह  स्वयं चतुर्थ भाव के स्वामी हैं। इनका कारक तत्व जल है और गुण मूल है। कर्क राशि में पैदा होने वाले लोग देशभक्त, जुझारू और तेज याददाश्त वाले होते हैं। कर्क राशि में पैदा हुए जातकों को पेट से संबंधित समस्याएं, गैस और अपच की समस्या के अलावा पानी से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं। उन्हें टांगों और पैरों में दर्द की समस्या भी होती है। योग और ज्योतिष के जानकारों के अनुसार कर्क राशि के जातकों को अर्ध चंद्रासन आसन करना चाहिए। इस आसन में जातक का शरीर आधे चंद्रमा के आकार में आ जाता है। अर्ध चंद्रासन करने से शरीर का संतुलन सुधरता है। इस आसन के अभ्यास से छाती और भुजाओं का विकास ठीक होता है। योग का अभ्यास करने से कर्क राशि के जातकों को असहनीय पीड़ा का हल तलाशने में मदद मिलती है। इसका कारण ये भी है कि कर्क राशि वाले प्रकृति के बेहद करीब होते हैं।
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Rashi Ke Anusar Yoga - फोटो : pixabay
सिंह  राशि 
सिंह राशि के स्वामी ग्रह सूर्य हैं। और वह स्वयं पंचम भाव यानि बुद्धि के भाव के स्वामी है। इनका कारक तत्व अग्नि है और यह स्थिर गुण वाले होते हैं। सिंह राशि को सभी राशियों का राजा भी माना जाता है। इस राशि में पैदा होने वाले जातक शेर की तरह ही निडर, महत्वाकांक्षी और ऊर्जा से भरपूर होते हैं। सिंह राशि का स्वामी सूर्य होता है। सिंह राशि के लोग अपने दिमाग से जरूरत से ज्यादा परिश्रम करते हैं। इसी वजह से उन्हें सिरदर्द, नज़र कमज़ोर होना और सिर में चोट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। सिंह राशि का स्वामी सूर्य को माना जाता है। इसलिए सिंह राशि वालों के सबसे बढ़िया आसन सूर्य नमस्कार  है। ये आसन इस राशि के लोगों के व्यक्तित्व की खूबियों से भी मिलता है। सूर्य नमस्कार करने से योगी के संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास होता है। इस आसन को करने से रक्त संचार, श्वसन तंत्र और पाचन क्रिया में सुधार आता है।
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Rashi Ke Anusar Yoga - फोटो : iStock
कन्या राशि 
कन्या राशि के स्वामी ग्रह बुध है और वह स्वयं छठे भाव के स्वामी है। इनका कारक तत्व पृथ्वी है और गुण चर है। कन्या राशि में पैदा होने वाले लोगों को पेट, नसों और पाचनतंत्र से जुड़ी बीमारियां होने की संभावना रहती है। इस राशि वालों को बीमारियों से बचने के लिए विपरीत करणी आसन करना चाहिए। विपरीत करणी आसन में योगी के दोनों पैर दीवार के सहारे ऊपर जाने की मुद्रा में होते हैं। ये आसन करने से तनाव और बेचैनी को शरीर से दूर रखने में मदद मिलती है। कन्या राशि वालों को शीर्षासन  करने की भी सलाह देते हैं। इस आसन से पाचन क्रिया और तनाव को दूर रखने में काफी मदद मिलती है।

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Rashi Ke Anusar Yoga - फोटो : Istock
तुला राशि 
तुला राशि  के स्वामी ग्रह शुक्र हैं वे स्वयं सातवें भाव के स्वामी है। इनका कारक तत्व वायु है और इनका गुण मूल है। तुला राशि के जातक को अक्सर कमर दर्द , गुर्दा/किडनी और सिरदर्द की समस्या रहती है। वे आसानी से तनाव और अवसाद के भी शिकार हो जाते हैं। तुला राशि के जातकों को ऐसा आसन करना चाहिए जो उनके शरीर में सभी तत्वों के संतुलन को बढ़ाने वाला हो। शरीर में ऐसा संतुलन सिर्फ सांसों के संतुलन को बढ़ाकर ही हासिल किया जा सकता है। इसलिए, तुला राशि के लोगों को नाड़ी शोधन प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए। इस प्राणायाम से श्वसन तंत्र बेहतर होता है। जबकि शरीर में स्थिरता बढ़ती है और तनाव दूर होता है।

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Rashi Ke Anusar Yoga - फोटो : Istock
वृश्चिक राशि 
वृश्चिक राशि के स्वामी ग्रह मंगल और केतु हैं। और ये स्वयं अष्टम भाव के स्वामी है। इनका कारक तत्व जल है और गुण स्थिर हैं। वृश्चिक राशि वालों में रोगों से लड़ने की क्षमता बेहद अच्छी होती है। इसके बावजूद उन्हें  गुर्दे में संक्रमण/किडनी इंफैक्शन जैसी समस्या हो सकती हैं। योग गुरु अक्सर वृश्चिक राशि वालों को उष्ट्रासन करने की सलाह देते हैं। इस आसन में योगी का शरीर ऊंट की मुद्रा बनाता है। उष्ट्रासन के अभ्यास से आपकी पीठ की मांसपेशियां मजबूत होता हैं और आपके निचले हिस्से के अंग मजबूत होते हैं।

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Rashi Ke Anusar Yoga - फोटो : istock
धनु राशि
धनु राशि के स्वामी घर गुरु है और वे स्वयं नवम भाव यानि भाग्य स्थान के स्वामी है। इनका कारक तत्व अग्नि है और गुण चर है।  धनु राशि के जातक किसी अन्य बीमारी की तुलना में सायटिका और जोड़ों के दर्द से ज्यादा प्रभावित होते हैं। धनु राशि वालों के लिए सुप्त मत्स्येन्द्रासन करने की सलाह देते हैं। इस आसन का अभ्यास करने के दौरान योगी का शरीर लेटकर करवट लेने की मुद्रा में होता है। इस मुद्रा का अभ्यास करने से पीठ के दर्द और तनाव से राहत मिलती है।

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Rashi Ke Anusar Yoga - फोटो : getty images
मकर राशि 
मकर राशि के वमी ग्रह शनि हैं और मकर दशम भाव के स्वामी है। इनका कारक तत्व पृथ्वी है और इनका गुण चर है। मकर राशि के जातकों को अक्सर अपच, गठिया और पैरों में दर्द की शिकायत रहती है। इसके अलावा भी उन्हें जोड़ों में दर्द की समस्या हो सकती है। मकर राशि के जातकों के लिए उत्कटासन लाभकारी है। इस आसन में योगी का शरीर कुर्सी की मुद्रा में आ जाता है। इस योगासन को करते हुए आपका वस्ति क्षेत्र  गुरुत्व बल के हिसाब से सीध में होता है, ये शरीर को ताकत और आरोग्य का अहसास देता है।

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Rashi Ke Anusar Yoga - फोटो : Istock
कुंभ राशि 
कुंभ राशि के स्वामी ग्रह भी शनि और राहु हैं। कुंभ स्वयं एकादश भाव यानि ये भाव के स्वामी है। इनका कारक तत्व वायु है और गुण स्थिर है। कुंभ राशि के जातक अक्सर बल्ड प्रेशर, पेट की बीमारियां, होती देखी गई हैं। इसके साथ ही उन्हें एनीमिया की भी समस्याएं हो सकती हैं । ऐसे में  कुंभ राशि वालों के लिए अर्ध मत्स्येन्द्रासन आसन करना चाहिए। इस आसन को करने से योगी की रीढ़ में मरोड़ की मुद्रा बनती है। इसके अलावा योग गुरु कुंभ राशि वालों को भुजंगासन करने की सलाह भी देते हैं। इस आसन में योगी सांप की मुद्रा बनाता है। इस आसन को करने से पेट के नीचे की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। इसके अलावा शरीर में रक्तसंचार बढ़ता है, पाचनतंत्र सुधरता है और कब्ज में भी आराम मिलता है।
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Rashi Ke Anusar Yoga - फोटो : social media
मीन राशि 
मीन राशि के स्वामी ग्रह गुरु हैं और मीन स्वयं द्वादश भाव यानि व्यय भाव के स्वामी है। इनका कारक तत्व जल है और गुण चर है। मीन राशि के जातकों को अक्सर नसों से संबंधित समस्याओं के अलावा अनिद्रा और अनीमियाजैसी बीमारियां होती हैं। मीन राशि वालों को हलासन करना चाहिए। इस आसन में योगी खेत में चलने वाले हल जैसी मुद्रा बनाता है। हलासन को करने से कमर दर्द में आराम मिलता है और अनिद्रा में भी राहत मिलती है। मीन राशि के ऐसे लोग जिन्हें खून की कमी की शिकायत है, उन्हें योग की शुरूआत प्राणायाम से करनी चाहिए। 
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