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गुरु और राहु का हो रहा है अशुभ संयोग, बनेंगे युद्ध के हालात

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अशुभ ग्रह राहु 9 जनवरी को सिंह राशि में आकर गुरु से मिलने वाला है। गुरु राहु के इस संयोग को लेकर ज्योतिषी काफी चिंतित हैं क्योंकि यह संयोग अशुभ फल का संकेत दे रहा है। इस अशुभ संयोग का क्या परिणाम हो सकता है बता रहे हैं ज्योतिषशास्त्री सचिन मल्होत्रा।
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गुरु और राहु का हो रहा है अशुभ संयोग, बनेंगे युद्ध के हालात

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9 जनवरी 2016 को राहु कन्या राशि से न‌िकलकर सिंह राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। राहु और केतु सदेव वर्की रहते हैं तथा यह एक  राशि में 18 महीने तक गोचर करते हुए 30 से 0 अंश का भ्रमण उल्टा चलते हुए करते हैं। राहु को ज्योतिष शास्त्र में मलेछ ग्रह कहा जाता हैं जो की मुख्य रूप से युद्ध, धार्मिक उन्माद , विदेशी आक्रान्ताओं, आतंकवाद, और स्कैंडल्स को दर्शाता है। सिंह राशि में देव गुरु बृहस्पति इस समय वक्री गति से गोचर करते हुए 29 अंशों के करीब हैं। राहु भी जब सिंह राशि में प्रवेश करेंगे तो वह अपनी उलटी गति से आते हुए गुरु के 29 अंशों के बेहद निकट होंगे यह योग विश्व-शांति के लिए शुभ संकेत नही है।
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धर्म, बैंकिंग और सोने का कारक ग्रह गुरु न केवल दुःख-कारक शनि की दसवीं दृष्टि से पीड़ित होगा अपितु राहु से उसकी युति 'एक तो करेला ओर ऊपर से नीम चढ़ा' की कहावत को चरितार्थ करती प्रतीत होगी। 9 जनवरी के बाद सिंह राशि में राहु के आते ही तनाव बढ़ने के साथ शेयर बाजार और सोने के दामों में गिरावट देखी जाएगी। शेयर बाजार विशेषकर बैंकिंग सेक्टर में बड़ी गिरावट के बाद प्रॉपर्टी के दामों में भी बड़ी कमी आएगी।

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राहु-गुरु की यह युति ज्योतिष में 'चांडाल योग' के नाम से जानी जाती है। इस योग के कारण देशों के मध्य धार्मिक विवाद युद्ध का रूप लेते दिखें तो हैरत न होगी। अभी जनवरी के प्रथम सप्ताह में एक शिया धर्म गुरु की हत्या के बाद ईरान में सऊदी दूतावास पर हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद मध्य-एशिया में तनाव का माहौल बन गया है। सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन और सूडान जैसे सुन्नी बहुल देशों ने शिया बहुल ईरान से अपने राजनीतिक संबंध ख़त्म कर दिए हैं।
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अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में यह बात जग-जाहिर है की अमेरिका सऊदी अरब और उसके सहयोगी सुन्नी बहुल देशों का समर्थक है। दूसरी ओर शिया ईरान को रूस का समर्थन हमेशा मिलता रहा है। ज्योतिष के दृष्टिकोण से देखें तो अनुराधा और ज्येष्ठा नक्षत्रों से गोचर करते हुए शनि पश्चिम दिशा में महा-युद्ध और राजाओं का पतन दर्शाते हैं। शनि इस वर्ष इन्ही दो नक्षत्रों का भ्रमण करेंगे। स्‍थ‌िति अधिक विकट तब होगी जब मंगल भी 25 फरवरी को वृश्चिक राशि में शनि से जा मिलेंगे। मंगल और शनि की वृश्चिक में युति तथा उनसे केंद्र में राहु और गुरु की सिंह राशि में युति मध्य-एशिया में बड़े युद्ध का संकेत है।
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गुरु और राहु का हो रहा है अशुभ संयोग, बनेंगे युद्ध के हालात

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कन्या लग्न से प्रभावित इजराइल भी जल्द ही युद्ध-उन्माद की चपेट में आ जाएगा जब उसकी कुंडली में बाहरवें घर में बैठे मंगल की दशा 15 फरवरी से शुरू होगी। वृषभ लग्न से प्रभावित भारत के चतुर्थ भाव में राहु आकर आंतरिक शांति को भंग कर देंगे। आतंकवादी घटनाओं के बढ़ने के साथ भारत-पाक की शांति वार्ता रद्द हो सकती है ज‌िसका पर‌िणाम यह हो सकता है क‌ि अप्रैल-मई में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसी स्‍थ‌ित‌ि बन सकती है।
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