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ये दोष बनते हैं परेशानियों का कारण, देखिए कहीं आपकी कुंडली में तो नहीं !

Sat, 23 Nov 2019 08:06 AM IST
रुस्तम राणा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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कुंडली - फोटो : kundali

कुंडली वह पत्री है जिसमें आपके जन्म के समय ग्रह-नक्षत्रों और राशियों की स्थिति का वर्णन होता है। इसके माध्यम से व्यक्ति के भाग्य का विश्लेषण किया जा सकता है। कुंडली में ग्रहों की युति या उनकी स्थितियों से योगों का निर्माण होता है। ये योग शुभ और अशुभ दोनों प्रकार के होते हैं। जो योग शुभ होते हैं उनसे जातकों को अच्छे फल प्राप्त होते है। इन्हें राज योग कहते हैं। वहीं इसके विपरीत जो योग अशुभ होते हैं, उनके कारण व्यक्ति के जीवन में कई परेशानियां आती हैं। आज हम आपको कुंडली में बनने वाले कुछ ऐसे योग बताएंगे जो बनते हैं परेशानी का कारण।

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पैसा - फोटो : amar ujala

चांडाल योग
अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में गुरु बृहस्पति के साथ राहु बैठा हो तो, दोनों की युति से कुंडली में चांडाल योग बनता है। चांडाल योग से व्यक्ति को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके प्रभाव से ऋण में बढोतरी होती है। इस योग की शांति के लिए गुरु बृहस्पति की शांति के उपाय करने चाहिए। गुरुवार के दिन पीली चीजों का दान करना इस योग का एक निवारण है।

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relationship - फोटो : pixa

षड्यंत्र योग
लग्न भाव का स्वामी (लग्नेश) अगर अष्टम भाव में बिना किसी शुभ ग्रह के हो तो कुंडली में षड्यंत्र योग का निर्माण होता है। जिस व्यक्ति की कुंडली में यह योग होता है उसकी धन-संपत्ति नष्ट होने की आशंका रहती है। इस योग के चलते कोई विपरीत लिंगी जातक इन्हें भारी मुसीबत में डाल सकता है। इस योग से बचने के लिए भगवान शिव की आराधना करें। 

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lunar eclipse - फोटो : pti

केमद्रुम योग
जब कुंडली में चंद्रमा किसी भाव में अकेला बैठा हो, उसके आगे यानि दूसरे और पीछे यानि की बाहरवें स्थान पर कोई ग्रह न हो तो और न ही उस पर किसी ग्रह की दृष्टि पड़ रही हो तो इसे केमद्रुम योग कहते हैं। यह योग व्यक्ति के लिए परेशानी का कारण बनता है। इस योग को दूर करने के लिए चंद्रमा से संबंधित वस्तुओं का दान करना चाहिए।

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Lunar Eclipse seen in Odisha - फोटो : ANI

ग्रहण योग
किसी भी भाव में चंद्रमा के साथ राहु-केतु बैठे हों तो यह स्थिति कुंडली में ग्रहण योग बनाती है। इस योग के कारण जीवन में अस्थिरता आ जाती है। व्यक्ति नौकरी-व्यापार में अस्थिरता के कारण परेशान रहता है। इस अशुभ योग के निवारण के लिए जातकों को चंद्र ग्रह की शांति के उपाय करने चाहिए।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अल्पायु योग
अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा पापी या क्रूर ग्रहों के साथ त्रिक स्थान (छठे, आठवें, बारहवें भाव) पर बैठा हो तो यह स्थिति कुंडली में अल्पायु योग का निर्माण करती है। ऐसे जातक पर सदैव मृत्यु का संकट बना रहता है। इसलिए इस दोष से बचने के लिए जातकों को महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए।
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