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Ganesh Chaturthi 2019 : गजानन के रूप में छुपे हैं जन-जन के लिए सन्देश

Tue, 27 Aug 2019 07:14 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन, वास्तुविद
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गणेश चतुर्थी का पावन पर्व मंगलमूर्ति विघ्नहर्ता भगवान गणेश के अवतरण दिवस के रूप में देश ही नहीं, अपितु विश्वभर के सनातन धर्मावलम्बियों द्वारा बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। गणपति आदिदेव हैं जिन्हें प्रथम पूज्य की गरिमामय पदवी हासिल है। सनातन धर्म के अनुसार किसी भी कार्य के पहले गणेश जी पूज्यनीय हैं। इसलिए इन्हें आदिपूज्य भी कहते हैं। आइए जानते हैं बड़े ही मनमोहक से दिखने वाले गणेश जी के भव्य और दिव्य स्वरुप, शारीरिक संरचना में भी विशिष्ट व गहरा अर्थ निहित है। 

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ganesh chaturthi
गणेश जी की सूंड
उनकी लम्बी सूंड महाबुद्धित्व का प्रतीक है। लम्बी सूंड तीव्र घ्राण शक्ति की महत्वता को प्रतिपादित करती है जो विवेकी व्यक्ति है। वह अपने आस -पास के माहौल को पहले से ही सूंघ सकता है। गणेश जी की सूंड हमेशा हिलती-डुलती रहती है और एक प्रकार से हमेशा सचेत होने का संकेत देती है। शास्त्रों के अनुसार सुख, समृद्धि व ऐश्वर्या की प्राप्ति के लिए उनकी बायीं ओर मुड़ी सूंड की पूजा करनी चाहिए और यदि किसी शत्रु पर विजय प्राप्त करनी हो तो दायीं ओर मुड़ी सूंड की पूजा करनी चाहिए।

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Ganesh Chaturthi
बड़ा पेट 
गणेश जी का पेट भी बहुत बड़ा है सामान्यतः इसकी वजह उन्हें मिष्ठान पसंद होना माना जाता है। उनके लम्बोदर होने के पीछे एक कारण यह भी माना जाता है कि वे हर अच्छी -बुरी बात को पचा जाते हैं । इससे ये सन्देश मिलता है क़ि मनुष्य को हर बात अपने अंदर रखकर किसी भी बात का निर्णय बड़ी सूझ -बूझ के साथ लेना चाहिए व लम्बोदर स्वरुप से हमें ग्रहण करना चाहिए क़ि बुद्धि के द्वारा हम समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं और सबसे बड़ी समृद्धि प्रसन्नता है।

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बड़े कान
श्री गणेश जी का एक नाम 'गजकर्ण ' भी है। लम्बे कान वालों को भाग्यशाली भी कहा जाता है। श्री गणेश तो भाग्यविधाता और शुभफलदाता हैं। गणेश जी के कान सूप की तरह हैं और सूप का स्वभाव है क़ि वह सार- सार को ग्रहण कर लेता है और कूड़ा करकट को उड़ा देता है। गणेश जी के कानों से यह सन्देश मिलता है क़ि मनुष्य को सुननी सबकी चाहिए, लेकिन अपने बुद्धि विवेक से ही किसी कार्य का क्रियान्वयन करना चाहिए।

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एक हाथ में मोदक
गणेश जी के हाथ में मोदक होता है। कहीं -कहीं उनकी सूंड के अग्र भाग पर मोदक दिखाई देता है। मोदक को महाबुद्धि का प्रतीक बताया गया है। मोदक का निर्माण अमृत से हुआ है। मोदक ब्रह्मशक्ति का भी घोतक है। मोदक बन जाने के बाद वह अंदर से दिखाई नहीं देता है क़ि उसमें क्या -क्या समाहित है, इसी तरह पूर्ण ब्रह्म भी माया से आच्छादित होने के कारण वह हमें दिखाई नहीं देता।

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पाश और अंकुशधारी
गणेश जी के हाथ में पाश और अंकुश है। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में अंकुश और पाश की आवश्यकता पड़ती है। अपने चंचल मन पर अंकुश लगाने की अत्यंत आवश्यकता है। अपने भीतर की बुराईयों को पाश में फंसाकर आप उन पर अंकुश लगा सकते हैं।

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एक दन्त हैं गणेश
गणेश जी का एक ही दांत है, दूसरा दन्त खंडित है। यह गणेश जी की कार्यक्षमता और दक्षता का बोधक है। एक दन्त होते हुए भी वे पूर्ण हैं। यह इस बात का सूचक है कि हमें अपनी कमी का रोना ना रोते हुए जो भी हमारे पास संसाधन उपलब्ध हैं उसी में हमें दक्षता के साथ कार्य संपन्न करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार इसी टूटे दांत की लेखनी बनाकर गणेश जी ने महाभारत लिखी थी।

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वर मुद्रा में गणेश
गणपति अक्सर वर मुद्रा में दिखाई देते हैं। वरमुद्रा सत्वगुण की प्रतीक है। इसी से वे भक्तों की मनोकामना पूरी कर अपने अभय हस्त से संपूर्ण भयों से भक्तों की रक्षा करते हैं। इस प्रकार गणेश जी का उपासक रजोगुण, तमोगुण ,सत्वगुण इन तीनों गुणों से ऊपर उठकर एक विशेष आनंद का अनुभव करने लगता है।

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