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Navgrah Mantra: इन आसान मंत्रों से कर सकते हैं राहु और शनि को शांत, जानें किस ग्रह का कौन सा मंत्र

Thu, 25 Feb 2021 04:04 PM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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ग्रह नक्षत्र
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि, सूर्य, गुरू, मंगल, बुध, शुक्र, चंद्रमा और राहु-केतु, को नवग्रह कहा जाता है। इन नवग्रहों की शुभ-अशुभ स्थिति व्यक्ति पर गहरा प्रभाव करती हैं। ग्रहों की शुभ स्थिति से व्यक्ति का जीवन सुखमय होता है और तरक्की प्राप्त होती है, तो वहीं ग्रहों की अशुभ स्थिति के कारण व्यक्ति के जीवन में कई प्रकार की समस्याएं आने लगती हैं। प्रत्येक ग्रह अलग-अलग फल प्रदान करता है। हर ग्रह को अनुकूल बनाने के लिए अलग-अलग मंत्रों का जाप किया जाता है। इन मंत्रों के जाप से आप ग्रहों के अशुभ प्रभाव के कारण होने वाली परेशानियों से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं। तो चलिए जानते हैं किस ग्रह को शांत करने के लिए कौन से मंत्र का जाप करना चाहिए।
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ग्रह नक्षत्र
सूर्य ग्रह
ज्योतिष में सूर्य को सभी ग्रहों का राजा माना गया है। सूर्य को मान-सम्मान और पिता-पुत्र का कारक माना गया है। सूर्य की स्थिति के मजबूत बनाने के लिए गायत्री मंत्र का उच्चारण करते हुए तांबे के लोटे से जल देना चाहिए। सूर्य की स्थिति को मजबूत बनाने के लिए इस मंत्र का जाप करें।
 ''ऊँ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नम:''
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chandra dev - फोटो : aa
चंद्र ग्रह
ज्योतिष में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। चंद्रमा की अशुभ स्थिति के कारण व्यक्ति को मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। चद्रंमा को शुभ बनाने के लिए भगवान शिव की पूजा के साथ इस मंत्र का जाप करना चाहिए। 
''ऊँ सों सोमाय नम:''

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mars
मंगल ग्रह
ज्योतिष में मंगल को ग्रहों का सेनापति माना गया है। मंगल ग्रह साहस, पराक्रम का कारक ग्रह हैं। मंगल की अशुभता के कारण व्यक्ति के स्वभाव में क्रोध की अधिकता, विवाह में परेशानियां जैसी समस्याएं आने लगती हैं। मंगल ग्रह की अशुभता कम करने के लिए हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए। इसके साथ ही मंगल के इस मंत्र का जाप करना चाहिए। 
''ऊँ अं अंगारकाय नम:''
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बुध ग्रह
बुध ग्रह
ज्योतिष में बुध को एक किशोर ग्रह और ग्रहों का राजकुमार माना गया है। बुध ग्रह का संबंध बुद्धि, वाणी, और त्वचा से है। बुध ग्रह की अशुभता को दूर करने के लिए बुधवार के दिन भगवान गणेश का पूजन करना चाहिए। बुध ग्रह को अनुकूल बनाने के मंत्र इस प्रकार है। 
''ऊँ बुं बुधाय नम:''
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गुरु ग्रह
गुरू ग्रह 
ज्योतिष में गुरू यानि बृहस्पति ग्रह को सफलता और समृद्धि का कारक माना गया है। गुरू को मजबूत बनाने के लिए बृहस्पतिवार के दिन केले के पेड़ का पूजन करना शुभ रहता है। गुरू ग्रह को अनुकूल करने के लिए इस मंत्र का जाप करें। 
''ऊँ बृं बृहस्पतये नम:''
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venus planet
शुक्र ग्रह 
शुक्र का संबंध भौतिक सुख-सुविधाओं, प्रेम संबंध आदि से माना गया है। इस ग्रह की अशुभता के कारण व्यक्ति के जीवन में सुख-सुविधाओं की कमी होने लगती है। शुक्र को अनुकूल करने के लिए इत्र का प्रयोग और दान करने के साथ ही शुक्र के इस मंत्र का जाप करना चाहिए।
''ऊँ शुं शुक्राय नम:''

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शनि ग्रह - फोटो : Pixabay
शनि ग्रह
शनि को एक क्रूर लेकिन न्याय प्रिय ग्रह कहा जाता है। शनि धीमी गति से राशियों में भ्रमण करते हैं, जिसके कारण शनि की साढ़ेसाती और शनि की ढैय्या लगती है। इस स्थिति में व्यक्ति को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। शनि की शुभता के लिए शनिवार के दिन पीपल के नीचे दीपक जलाना चाहिए और इस मंत्र का जाप करना चाहिए। 
''ऊँ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:''

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राहु - फोटो : rahu
राहु ग्रह
ज्योतिष में राहु को पापक ग्रह माना गया है। राहु के अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को हर कार्य में बाधाएं आने लगती हैं। इसके अलावा भी व्यक्ति को कई प्रकार के कष्टों को सहन करना पड़ता है। राहु को शांत करने के लिए भगवान शिव की पूजा लाभकारी हैं, इसके साथ ही राहु के इस मंत्र का जाप करने से समस्याओं से मुक्ति मिलती है। 
''ऊँ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नम:''
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Ketu
केतु ग्रह
ज्योतिष में केतु के एक रहस्मयी ग्रह माना गया है। जीवन में घटित होने वाली अचनाक घटनाएं केतु से संबंधित होती हैं। केतु की शांति के लिए भगवान गणेश की पूजा करनी चाहिए। केतु को अनुकूल करने हेतु इस मंत्र का जाप करना चाहिए। 
''ऊँ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं स: केतवे नम:''
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