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ज्योतिषशास्त्र : ऐसे लोग बनते हैं धनवान और बिताते हैं सुखी जीवन, जिनकी कुंडली में बने ये शुभ योग

Tue, 16 Mar 2021 07:41 AM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पंचमहापुरुष योग कुंडली में बनने पर जातक बहुत ही धनवान होता है। ऐसे जातकों पर हमेशा मां लक्ष्मी कृपा बरसाती हैं। - फोटो : अमर उजाला
वैदिक ज्योतिषशास्त्र में किसी जातक की कुंडली का अध्ययन कर कुंडली में मौजूद ग्रहों की शुभ या अशुभ स्थिति को देखकर जातक की परेशानियों, सुख सम्पदा और धन लाभ आदि के बारे में बताया जाता है। आज हम आपको कुंडली में बनने वाले कई तरह के शुभ योगों में कुछ के बारे में बताने जा रहे हैं।

पंचमहापुरुष योग
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जातक की कुंडली में अगर पंचमहापुरुष योग में से कोई भी एक योग बनता है तो वह पंचमहापुरुष योग कहलाता है। करोड़पति बनाने वाले इन पांच योग बहुत ही शुभ और राजयोग के समान फलदायी होते हैं। इन्हें ज्योतिषशास्त्र की भाषा में पंच महापुरुष योग कहा जाता है। पंचमहापुरुष योग वह योग होता है जब किसी जातक की कुंडली में मंगल, गुरु, शुक्र, बुध और शनि ग्रह में से कोई एक ग्रह या फिर एक से ज्यादा ग्रह स्वयं की राशि में उच्च होकर जातक की कुंडली में केंद्र में हो। पंचमहापुरुष योग कुंडली में बनने पर जातक बहुत ही धनवान होता है। ऐसे जातकों पर हमेशा मां लक्ष्मी कृपा बरसाती हैं।
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दिव्य योग
यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में गुरु स्वयं की राशि यानी धनु या मीन में हो और अपनी उच्च राशि कर्क में केन्द्र स्थान यानी पहले, चौथे, सातवें या दसवें घर में मौजूद हो तब दिव्य योग बनता है। यह योग मेष, कर्क, तुला और मकर लग्न वालों की कुण्डली में बनता है।जिन जातकों की कुण्डली में यह योग बनता है वह चरित्रवान और महान विचारों वाला होता है। ऐसे जातक लंबे समय तक सुखमय जीवन बिताते हैं। जीवन में सफलता की ऊंचाईयों तक पहुंचते हैं। समाज में इनका आदर होता है और लोग इनके गुणों एवं उपलब्धियों की प्रशंसा करते हैं।
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शुक्र ग्रह (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
मालव्य योग
शुक्र ग्रह के कारण कुंडली में यह योग बनता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जब शुक्र अपनी उच्च राशि में बैठे हों और पहले, चौथे, सातवें या दसवें घर में अपनी राशि तुला या वृष में हो। तब यह योग बनता है। जिस व्यक्तियों की कुण्डली में यह योग बनता है वह रोमांटिक, सुंदर और आकर्षक होते हैं। ऐसे व्यक्ति जीवन में खूब धन कमाते हैं और ऐसो आराम से जीवन का आनंद लेते हैं। इनकी रुचि भौतिक सुख के साधनों में रहती है। ऐसे व्यक्ति चतुर और दीर्घायु होते हैं।

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shani dev
शश या शुभ योग 
अगर किसी जातक की कुण्डली में शनि ग्रह पहले, चौथे, सातवें अथवा दसवें घर में अपनी स्वयं की राशि मकर या कुंभ में विराजमान होते हैं तो शुभ योग बनता है। इस योग को शश योग के नाम से जाना जाता है। यह एक प्रकार का राजयोग है। शनि अगर तुला राशि में भी बैठा हो तब भी यह शुभ योग अपना फल देता है। इसका कारण यह है कि शनि इस राशि में उच्च के होते हैं। जिनकी कुण्डली में यह योग मौजूद होता है वह व्यक्ति गरीब परिवार में भी जन्म लेकर भी एक दिन धनवान बन जाता है। मेष, वृष, कर्क, सिंह, तुला वृश्चिक, मकर एवं कुंभ लग्न में जिनका जन्म होता है उनकी कुण्डली में इस योग के बनने की संभावना रहती है।
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मंगल के उपाय
रुचक योग
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार कुंडली में अगर मंगल केन्द्र स्थान यानी पहले, चौथे, सातवें या दसवें घर में अपनी उच्च राशि मकर या मेष में हो तो रुचक बनता है। जिनकी जन्मपत्री में यह योग होता है वह साहसी और बलवान होते हैं। ऐसे व्यक्ति समाज में प्रभावशाली और कुशलवक्ता होते हैं। यह दीर्घायु होते हैं और सुख एवं ऐश्वर्य का आनंद प्राप्त करते हैं। इस योग को भी राजयोग के समान शुभ माना गया है।
 
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बुध ग्रह - फोटो : social media
भद्रक योग
पांचवां शुभ योग है भद्रक योग। इस योग को भी राजयोग के समान शुभ फलदायी माना जाता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार यह योग बुध के कारण निर्मित होता है। जब किसी व्यक्ति की कुण्डली में बुध कन्या राशि में मौजूद होता है तब यह योग अपना शुभ फल देता है। इस योग से प्रभावित व्यक्ति   पढ़ने-लिखने में होशियार होते हैं। यह व्यापार, लेखन एवं गणित के क्षेत्र में खूब नाम और यश अर्जित करते हैं। ऐसे व्यक्ति अपनी योग्यता और ज्ञान से सम्मानित और धनवान बनते हैं।
 
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