फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तराखंड के क्रिकेट खिलाड़ियों के लिए खुशखबरी, आएंगे अच्छे दिन

Fri, 18 Dec 2015 04:06 PM IST
अभिषेक सिंह/ अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
उत्तराखंड के खिलाड़ियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। जल्द ही भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) उत्तराखंड को मान्यता देने जा रहा है।
विज्ञापन


इसके मिलते ही सेंट्रल जोन की टीम में शामिल होने वाली उत्तराखंड छठी टीम हो जाएगी। अभी तक इसमें उत्तरप्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, विदर्भ शामिल हैं।

हालांकि बीसीसीआई सचिव अनुराग ठाकुर ने इस बारे में कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। लेकिन जो संकेत मिले हैं, इससे साफ है कि बीसीसीआई उत्तराखंड को एसोसिएट मेंबर के तौर पर मान्यता देने जा रही है।
विज्ञापन


2000 में उत्तरप्रदेश से अलग होने के बाद से उत्तराखंड के खिलाड़ी यूपी से ही खेल रहे हैं। यहां के खिलाड़ियों को मुरादाबाद जोन से खेलने का मौका मिलता है।

कई बार एक जोन से लिमिटेड खिलाड़ी चुने जाने की वजह से यहां की प्रतिभाओं से न्याय नहीं हो पाता। इसके चलते कई प्रतिभावान खिलाड़ी दूसरे राज्यों से खेलते हैं। इसकी बानगी नैनीताल के मनीष पांडे, बागेश्वर के पीयूष पांडे, पिथौरागढ़ के उन्मुक्त चंद हैं।

वहीं गढ़वाल एक्सप्रेस नाम से मशहूर पवन सुयाल दिल्ली और राबिन बिष्ट राजस्थान से रणजी के लिए खेलते हैं। इसके अलावा आर्यन जुयाल, आर्यन शर्मा, आर्या शेट्ठी, प्रियांशु खंडूड़ी हिमाचल और एकता विष्ट, हेमलता काला, अभिषेक रमन, अभिमन्यू ई.श्रीधरन भी दूसरे राज्यों से खेल रहे हैं।

इन खिलाड़ियों को अपने राज्य से नहीं खेल पाने का मलाल है और इसकी वजह कुछ और नहीं, यहां के बोर्ड को बीसीसीआई की मान्यता नहीं होना है। उत्तराखंड के साथ ही गठित हुए झारखंड को 2004 और छत्तीसगढ़ को 2008 में बीसीसीआई की मान्यता मिल चुकी है।

दो एसोसिएशन के झगड़े के कारण लटका ‌था मामला

बीसीसीआई में कई बार उत्तराखंड को मान्यता देने के लिए पैरवी भी हुई और उसकी मान्यता कमेटी ने कई मर्तबा उत्तराखंड में स्टेडियम से लेकर विभिन्न एसोसिएशनों की स्थिति की रिपोर्ट भी तैयार की। लेकिन हर बार मामला दो एसोसिएशन के झगड़े के कारण लटक गया।

सूत्रों की माने तो बीसीसीआई ने उत्तराखंड को एसोसिएट मेंबर के रूप में मान्यता देने का मन बना लिया है। इसकी रूपरेखा पिछले साल मसूरी और इस साल नैनीताल में हुई बोर्ड बैठक में बन चुकी है। इसके अलावा यूपीसीए और देहरादून के बीच कानपुर के कमला क्लब में हुए मैच भी बीसीसीआई के सकारात्मक रुख की ओर इशारा कर रहे हैं।

नार्थ के अध्यक्ष बनने के आसार
बीसीसीआई बोर्ड का अध्यक्ष बनने के लिए पदाधिकारी लॉबिंग करते हैं। यही वजह है कि अधिकतर बोर्ड अध्यक्ष महाराष्ट्र या पश्चिम बंगाल से ही होते रहे हैं। लेकिन उत्तराखंड बोर्ड को मान्यता मिलने के बाद उत्तर भारत के राज्यों से अध्यक्ष बनने का रास्ता साफ हो जाएगा। क्योंकि एक एसोसिएशन बढ़ने से वोटिंग राइट भी बढ़ जाएंगे।

मान्यता मिलते ही बनेंगी पांच टीमें
बीसीसीआई से उत्तराखंड को मान्यता मिलते ही पांच टीमें बनेंगी। ये टीमें होंगी- अंडर-14, अंडर-16, अंडर-19 और महिला क्रिकेट में जूनियर और सीनियर। बोर्ड के बड़े टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए उत्तराखंड की इन टीमों को लगातार तीन से चार साल तक बेहतर प्रदर्शन करना होगा।
विज्ञापन

अभी ये हैं एसोसिएट मेंबर

मेंबर
- बिहार क्रिकेट एसोसिएशन
- छत्तीसगढ़ क्रिकेट एसोसिएशन
- मणिपुर क्रिकेट एसोसिएशन
- सिक्किम क्रिकेट एसोसिएशन

‘प्रदेश के खिलाड़ियों के हित में यह काफी पहले हो जाना चाहिए था। बीसीसीआई ने दो महीने पहले मान्यता के लिए कमेटी भी बनाई है। लेकिन मानकों को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।’
- पीसी वर्मा, सचिव, क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तरांचल

‘उत्तराखंड की क्रिकेट को जल्द मान्यता मिलने की उम्मीद है। अभी हम इस बारे में बीसीसीआई के सचिव से भी मिले थे। अगली स्पेशल एजीएम में इस पर मुहर लगने की प्रबल संभावना है।’
- चंद्रकांत, सचिव, उत्तरांचल क्रिकेट एसोसिएशन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें