श्रीलंका क्रिकेट टीम ने मीरपुर में फाइनल मैच में भारत को 6 विकेट से हराकर पहली बार टी-20 वर्ल्ड कप खिताब पर कब्जा जमाने का सपना पूरा कर लिया है।
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श्रीलंका ने जहां 18 साल का अपना सपना पूरा किया, वहीं भारत दुर्लभ इतिहास बनाने से रह गया। टीम इंडिया के अनुरूप परिणाम नहीं आने के बावजूद इस मैच में भी कई रिकॉर्ड बने।
विराट कोहली के लिए यह टूर्नामेंट यादगार रहा और इसे कोहली की अवस्मिरणीय पारियों के लिए याद रखा जाएगा।
सिर्फ दो भारतीय बल्लेबाज ही लगा सके बाउंड्रीज
भारतीय बल्लेबाजों ने फाइनल मुकाबले में 12 बार गेंद को सीमारेखा के पार पहुंचाया जिसमें 8 चौका और 4 छक्का शामिल है।
इन 12 मौकों में विराट कोहली ने कुल 9 चौके-छक्के जमाए। इस तरह से भारत ने अपने किसी टी-20 मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए सबसे कम चौके-छक्के लगाने के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। इस मैच में क्रीज पर उतरे बल्लेबाजों में सिर्फ कोहली और रोहित शर्मा ही बाउंड्रीज लगा सके। जबकि इसी मैच में श्रीलंका ने 20 बाउंड्रीज (16 चौका और 4 छक्का) लगाए।
पाकिस्तान के खिलाफ 2012 में बंगलुरू में भारत ने 12 बाउंड्री (9 चौका और 3 छक्का) लगाया था।
तेज पारी के बाद सबसे धीमी बल्लेबाजी का रिकॉर्ड
बाएं हाथ के बल्लेबाज युवराज सिंह के लिए यह टूर्नामेंट बेहद निराशाजनक रहा। फाइनल मैच से पहले उन्होंने दो मैच में इस कदर लचर बल्लेबाजी की कि टीम इंडिया हार के कगार पर पहुंच गई थी।
फाइनल मैच में भी उन्होंने बेहद घटिया बल्लेबाजी की। 21 गेंदों में महज 11 रन बनाने वाले युवराज की यह पारी टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत की ओर से तीसरी सबसे धीमी पारी (20 से ज्यादा गेंद) भी है।
टी-20 में सबसे धीमी बल्लेबाजी का रिकॉर्ड भारतीय कप्तान धोनी के नाम दर्ज है जिन्होंने 2008 में मेलबर्न में 27 गेंदों में 9 रन बनाए थे। हालांकि युवराज के नाम टी-20 में भारत की ओर से तीन सबसे तेज पारियां खेलने का भी रिकॉर्ड है।
फाइनल में कोहली ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड
विराट कोहली ने टी-20 वर्ल्ड कप में बेहद शानदार प्रदर्शन किया और चार अर्धशतकीय पारी के दम पर उन्होंने 319 रन बनाए। इस दौरान उनका औसत 106.33 का रहा। वह एक टी-20 वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज भी बन गए हैं। कोहली ने फाइनल मुकाबले में 58 गेंदों में 77 रनों की पारी खेली।
साथ ही वह दुनिया के मात्र तीसरे बल्लेबाज हैं जिन्होंने एक टी-20 वर्ल्ड कप में तीन सौ या तीन सौ से ज्यादा रन बनाए हैं। इससे पहले सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड दिलशान तिलकरत्ने (317 रन, 2009 वर्ल्ड कप) के नाम दर्ज था।
वह ऑस्ट्रेलिया के मैथ्यू हैडेन के बाद किसी वर्ल्ड कप में चार अर्धशतक लगाने वाले दूसरे बल्लेबाज बन गए हैं। कोहली ने 14 पारियों में पहले बल्लेबाजी करते हुए तीसरा अर्धशतक लगाया था।
टी-20 में इससे बेहतर टीम और कोई नहीं
श्रीलंका भले ही टी-20 क्रिकेट में पहली बार वर्ल्ड चैंपियन बना हो लेकिन उसका ओवरऑल प्रदर्शन किसी भी अन्य टीम की तुलना सबसे बेहतर है।
टी-20 वर्ल्ड कप में श्रीलंका का प्रदर्शन लाजवाब रहा है और वह टूर्नामेंट के पांच संस्करणों में से तीन बार फाइनल में और चार बार सेमीफाइनल में पहुंचने कारनामा किया है। जहां तक टीम इंडिया की बात है वह महज दूसरी बार ही सेमीफाइनल और फाइनल में पहुंची थी।
पिछले टी-20 वर्ल्ड कप (सितंबर, 2012) के बाद श्रीलंकाई टीम ने 18 मैच खेले जिसमें सिर्फ चार में ही हार मिली। वहीं भारत ने इस दौरान 11 मैच खेले और 8 में ही जीत हासिल कर पाए।
पांचवें प्रयास में 18 साल की तमन्ना पूरी
श्रीलंका की 1996 में वनडे में वर्ल्ड कप जीतने के बाद यह पहला बड़ा खिताब है। तब से लेकर श्रीलंका अब तक 5 वर्ल्ड कप (वनडे और टी-20) के फाइनल में पहुंच चुका है लेकिन इससे पहले हर बार उसे हार ही मिली।
उसे 2007 और 2011 वनडे वर्ल्ड कप के अलावा 2009 तथा 2012 टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल में भी उपविजेता बनने को मजबूर होना पड़ा था। 2011 में टीम इंडिया ने उसे हराया था।
1996 में पहली बार वर्ल्ड चैंपियन बनने वाली श्रीलंकाई टीम को अगला वर्ल्ड कप जीतने के लिए उसे 18 साल का इंतजार करना पड़ा।
टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल में 6 विकेट से हार के साथ ही भारत को दोहरा झटका लगा।
पहला, यह कि वह एक साथ आईसीसी के तीनों बड़े टूर्नामेंट्स अपने पास रखने का कारनामा नहीं कर सका। टीम इंडिया के पास इस समय वनडे वर्ल्ड कप और चैंपियंस ट्रॉफी खिताब हैं।
दूसरा, यह कि भारत अगर यह मैच जीत जाता तो टी-20 क्रिकेट में सबसे ज्यादा मैच (8) जीतने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बना देता। भारत ने इस टूर्नामेंट में लगातार पांच मैच जीते। इंग्लैंड और आयरलैंड के खाते में सबसे ज्यादा 8-8 मैच जीतने का वर्ल्ड रिकॉर्ड है।