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खेल के मैदान पर 2014 में होंगे ये हमारी उम्मीदों के तारे

Sat, 04 Jan 2014 07:10 PM IST
सत्येन्द्र पाल सिंह
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किसी ने वाकई सच कहा है कि उम्मीद पर दुनिया कायम है। यह भी सच है कि उम्मीद तो बहुतेरे बंधाते हैं पर कसौटी पर गिने-चुने ही खरे उतरते हैं। खेलों के लिहाज से भारत के लिए वर्ष 2014 खासा व्यस्त रहने वाला है।
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देश की उम्मीदें कई जांबाज खिलाड़ियों पर रहेंगी। इस साल भारत को क्रिकेट में ट्वंटी-20 वर्ल्ड कप के साथ विदेशी धरती पर 10 टेस्ट मैच खेलने हैं। यह साल भारतीय हॉकी के लिए भी खासा अहम है। हॉकी में भारत इस साल वर्ल्ड हॉकी लीग के साथ आगाज करेगा। भारत बैडमिंटन में इस साल थॉमस और उबेर कप, राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों में शिरकत करेगा। फुटबॉल में टीम इंडिया एशियाई खेलों में भाग लेगी।

क्रिकेट में विराट कोहली, चेतेश्वर पुजारा से उम्मीदें होंगी। हॉकी में दारोमदार सरदार सिंह और वीआर रघुनाथ पर रहेगा। बैडमिंटन में साइना नेहवाल और पीवी सिंधू से आस है। सुनील छेत्री और युवा तुर्क नारायण दास पर भी निगाहें होंगी।
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बल्‍लेबाजी में कोहली और पुजारा से आस

विराट कोहली और चेतेश्वर पुजारा का मिजाज और खेलने का अंदाज भले ही जुदा हों, लेकिन भारतीय क्रिकेट के इन दोनों युवा तुर्कों को अपनी जिम्मेदारी का अहसास बखूबी है। दोनों ही दरअसल चुनौती की कसौटी पर अब तक खरे उतरे हैं।

विराट ने अपने नाम के मुताबिक बहुत तेजी से बतौर क्रिकेटर अपना आकार खूब बढ़ाया। बहुत कम समय में क्रिकेट के जानकारों ने यह कहना शुरू कर दिया है कि वह सचिन तेंदुलकर के सही वारिस हैं। क्रिकेट में किसी भी क्रिकेटर को आंकने का पैमाना आज भी टेस्ट है। विराट ने टेस्ट में अब तक पांच और पुजारा ने छह शतक जड़े हैं।

पुजारा ने अपने इसी प्रदर्शन के बूते भारत की नई ‘दीवार’ का नाम पा लिया है। बीते साल के आखिर में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उसकी ही धरती पर विराट और पुजारा ने शतक जड़ कर यह साबित किया है कि वह देश नहीं बल्कि विदेश में दमदार प्रदर्शन का माद्दा रखते हैं।

अपनी धार और पैनी करेंगे मोहम्मद शमी

तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने गेंद से धार व रफ्तार दिखा कर खुद को भारत के पेस अटैक का तुरुप का इक्का साबित किया है। वह नई और पुरानी दोनों ही गेंद को दोनों ओर मूव करा कर बड़े से बड़े बल्लेबाज का क्रीज पर टिकना मुहाल कर देते हैं।

रणजी में शमी को उत्तर प्रदेश की नुमाइंदगी का मौका नहीं मिला लेकिन बंगाल से मौका मिलते ही उनकी तकदीर ही बदल गई। रफ्तार से गेंद फेंकना शमी को विरासत में मिला है। उनके पिता तौसीफ,चाचा और भाई, सभी खुद रफ्तार से गेंद फेंकते थे। भले ही सभी बड़े स्तर पर नहीं खेल पाए लेकिन ये सभी शमी के प्रेरणास्रोत हैं।

शमी का बॉलिग एक्शन ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। इसके कारण ही बल्लेबाज भांप नहीं पाते हैं कि शमी की गेंद कितनी रफ्तार से आएगी और कितनी स्विंग होगी। उनका असली इम्तिहान तो दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उसकी धरती पर था। इस इम्तिहान में भी वह सफल रहे। भारत को इस साल न्यूजीलैंड, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की धरती पर टेस्ट सीरीज खेलनी हैं। इस दौरान भारत दर्जन भर टेस्ट विदेशी धरती पर खेलेगा। टी-20 विश्व कप हालाँकि बांग्लादेश में होना है लेकिन ढाका के अस्थिर राजनीतिक हालात के चलते भारत को इसकी मेजबानी मिल सकती है।

सरदार, रघुनाथ और गुरजिंदर पर दारोमदार

सरदार सिंह, वीआर रघुनाथ और गुरजिंदर सिंह भारत हॉकी टीम की मजबूत कड़ी हैं। सरदार मूलतः हैं मिडफील्डर लेकिन दुनिया के सबसे बेहतरीन ऑलराउंडर में से एक हैं। वह भारतीय हॉकी टीम के कप्तान हैं। 27 बरस के सरदार भारत के आक्रमण और रक्षण की कड़ी हैं।

वह बतौर पेशेवर खिलाड़ी भी हॉलैंड और बेल्जियम लीग तथा भारत में प्रीमियर हॉकी लीग और हॉकी इंडिया लीग तक में अपने ऑलराउंड खेल से दुनिया का दिल जीत चुके हैं। भारत को इस बार वर्ल्ड हॉकी लीग, राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों में कामयाबी के लिए सरदार से बहुत आस होगी।

भारत के सबसे बुजुर्ग हॉकी खिलाड़ियों में से एक लगातार तीन ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता बलबीर सिंह सीनियर ने उन्हें वर्ल्ड क्लास खिलाड़ी ठीक ही कहा है। सरदार की सबसे बड़ी ताकत दबाव में खुद बेहतरीन प्रदर्शन कर टीम को बांधे रखना है। सरदार की कूवत के कायल भारत के हाई फरफार्मेंस डायरेक्टर रोलेट ओल्टमैंस और नए कोच टेरी वाल्श भी हैं।

25 साल के वीआर रघुनाथ बतौर फुलबैक भारत के किले की चौकसी करते हैं। साथ ही वह बेहतरीन ड्रैग फ्लिकर भी हैं। वह मौका मिलते ही आगे गोल करने से भी नहीं चूकते हैं। भारत की इस साल वर्ल्ड हॉकी लीग और एशियाई खेलों तथा राष्ट्रमंडल खेलों की कामयाबी में सरदार के साथ रघुनाथ का रोल अहम रहने वाला है।

गुरजिंदर सिंह उन हॉकी खिलाड़ियों में हैं, जिन्हें करियर के शुरू में ही गुरबत से निजात मिल गई। गुरजिंदर सिंह को तत्कालीन भारतीय हॉकी संघ की विद्रोही वर्ल्ड सीरीज हॉकी के मोस्ट वैल्यूबल खिलाड़ी के लिए एक करोड़ रुपए मिलने थे लेकिन मिले केवल 43 लाख। इसके बाद उन्होंने वर्ल्ड सीरीज हॉकी से तौबा कर हॉकी इंडिया का दामन थामा और देखते-देखते 18 वर्षीय गुरजिंदर हॉकी के गुर सीख कर भारत की सीनियर टीम के भी ड्रैगफ्लिकर बन गए हैं। वह भारत के लिए वर्ल्ड हॉकी लीग राउंड-2 में खेले।

गुरजिंदर सिंह अकेले बतौर फुलबैक और ड्रैग फ्लिकर के रूप में छह गोल कर अपनी प्रतिभा से न्याय कर पाए। वह 2014 में भारत की सबसे बड़ी उम्मीद साबित हो सकते हैं।

सुनील छेत्री और नारायण दास के पैरों पर यकीन

दिल्ली के स्ट्राइकर सुनील छेत्री निर्विवाद रूप से भाईचुंग भूटिया के वारिस हैं। वह टीम की ज़रूरत के मुताबिक बतौर विड्रान फॉरवर्ड खेलने से भी गुरेज नहीं करते। वह भारतीय फुटबॉल टीम की जान हैं।

सुनील छेत्री अब भूटिया के भारत के लिए सबसे ज्यादा 42 इंटरनेशनल गोल करने के रिकॉर्ड को तोड़ कर सुर्खियों में हैं। छेत्री (43 गोल) ने यह कामयाबी सिलीगुड़ी में भारत की नेपाल के खिलाफ मैच में जीत के दौरान गोल कर हासिल की। वह अपने करियर की सबसे बेहतरीन फॉर्म में हैं।

भारतीय टीम को इस साल एशियाई खेल में शिरकत करनी है। यह खेल हालांकि अंडर-23 आयु वर्ग के लिए होता है लेकिन इसमें हर टीम 23 वर्ष से अधिक उम्र के तीन खिलाड़ियों को शामिल कर सकती है। इस लिहाज से वह भविष्य की उम्मीद बताए जा रहे 20 बरस के युवा लेफ्ट बैक नारायण दास के साथ भारत को एशियाई खेलों में कामयाबी दिलाने का माद्दा रखते हैं।

नारायण दास ने पाइलोन एरोज में अपने कौशल से कोच पापास को खासा प्रभावित किया है। नारायण दास ने बेहतरीन टैकलिंग की बदौलत पहले ही सीजन में डेम्पो से खेलते हुए उसमें नियमित जगह बना ली। वह भारत की सीनियर टीम के लिए भी नेपाल के खिलाफ मैच में आगाज कर चुके हैं। सुनील छेत्री के साथ नारायण दास इस साल भारतीय फुटबॉल टीम की नैया किनारे लगा सकते हैं। छेत्री अब भी भारत के लिए तीन-चार साल और खेल सकते हैं। वह भारतीय टीम के युवा फुटबॉलरों के पथ प्रदर्शक बन सकते हैं।

कोर्ट पर जलवा दिखाने को तैयार साइना और सिंधू

साइना नेहवाल 2012 में लंदन ओलंपिक में कांसा जीतने वाली भारत की पहली खिलाड़ी बनने के साथ बीते बरस वर्ल्ड बैडमिंटन रैंकिंग में दुनिया की दूसरे नंबर की खिलाड़ी रहीं। साइना के साथ 2014 में भारतीय बैडमिंटन की उम्मीदें 18 बरस की पीवी सिंधू पर टिकीं हैं। ये दोनों ही भारत के महान बैडमिंटन उस्ताद पुलेला गोपीचंद की शागिर्द हैं।

साइना और सिंधू अपने रंग मे रहीं तो 2014 मे अपने चमकदार प्रदर्शन से भारतीय बैडमिंटन को निहाल कर सकती हैं। सिंधू ने विश्व चैपियनशिप में बीते साल कांस्य पदक जीत कर कामयाबियों का नया शिखर चूमा। इस साल सिंधू ने अपने छोटे लेकिन चमकदार करियर मे दूसरी बार राष्ट्रीय महिला बैडमिंटन का खिताब जीता।

भारत की उम्मीदें इस साल होने वाले थॉमस और उबेर कप में साइना के साथ सिंधू से भी रहेंगी। इस साल होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों में देश को बैडमिंटन में इन दोनों प्रतिभासम्पन्न खिलाड़ियों से पदक की आस होगी। 23 बरस की साइना ने बैडमिंटन में जो बुलंदियां चूमीं हैं, उस पर किसी को भी रश्क हो सकता है। वह विश्व जूनियर चैंपियनशिप और सुपर सीरीज जीतने वाली भारत की पहली खिलाड़ी हैं।

भारत के बैडमिंटन के महान उस्ताद पुलेला गोपीचंद की इस शागिर्द की कामयाबियों की फेहरिस्त ऐसी है जिस पर किसी भी उस्ताद को फख्र हो सकता है। खेल प्रेमी चाहते हैं कि वे ऐसे ही आगे बढ़ती रहें।
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तीरंदाजी में उम्मीदों के दीप जलातीं दीपिका

झारखंड के ग्रामीण अंचल से आने वाली तीरंदाज दीपिका कुमारी ने 2014 के लिए एक बार फिर उम्मीदों के नए दीप जलाए हैं। 21 बरस की दीपिका लंदन ओलंपिक की नाकामी को बुरे सपने की भांति भुलाकर इस साल राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों में भी भारत की पदक की सबसे बड़ी आस साबित होंगी।

वह तीन वर्ल्ड कप में रजत, दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेलों में 2010 में रिकर्व में वैयक्तिक और टीम स्पर्धा दोनों में सोने के तमगे जीत चुकी हैं। क्वांगचओ एशियाई खेलों में 2010 में कांसा जीत चुकी हैं।

अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित हो चुकीं दीपिका जमशेदपुर में 34वीं सीनियर राष्ट्रीय तीरंदाजी में लगातार छठा ख़िताब जीत कर डोला बैनर्जी को पीछे छोड़ चुकी हैं। वह बंगाल की कृष्णा घटक के लगातार सात खिताब जीतने के रिकॉर्ड से बस एक कदम के फासले पर हैं।

दीपिका ने अपनी फॉर्म बनाए रखी तो जरूर ही एक बार फिर इस साल राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में धमाल करेंगी। दीपिका की कामयाबी का सबसे बड़ा राज यह है कि वह अपनी गलतियों से जल्द सीखतीं हैं और उन्हें सुधारती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपनी तीरंदाजी तकनीक में कुछ बदलाव किए हैं।
 
खुद दीपिका की हसरत 2016 में होने वाले ओलंपिक खेलों में पदक जीतने की है। इसके लिए उन्हें पूरी तरह एकाग्र होकर तीर से लक्ष्य भेदने होंगे ताकि वे परफेक्ट 10 स्कोर कर सकें। देश को पता है कि वे ऐसा कर सकती हैं, इसलिए उनसे उम्मीदें भी बहुत बढ़ गयी हैं।
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