उत्तराखंड को राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी मिलने के बाद हॉकी की स्थिति बेहतर होने की उम्मीद जगी है। प्रदेश के दौरे पर आए हॉकी इंडिया के अधिकारी भी प्रदेश में खेल के प्रति खिलाड़ियों के जज्बे को देखकर गदगद दिखे।
इन्होंने प्रदेश के छह हॉकी सेंटरों का निरीक्षण किया। इसकी रिपोर्ट जल्द हॉकी इंडिया और साई को भेजी जाएगी। हॉकी इंडिया की सेंट्रल जोन के हाई परफॉरमेंस कमेटी के मैनेजर और द्रोणाचार्य अवॉर्डी एमपी कौशिक, हॉकी इंडिया संयुक्त सचिव केएस बाफिला शनिवार सुबह महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज पहुंचे।
यहां दोनों ने हॉकी की स्थिति, मैदान, आवासीय स्थिति की जानकारी ली। खिलाड़ियों से बातचीत कर उनकी समस्याओं और खेल की जानकारी को परखा। यहां से टीम एमकेपी इंटर कॉलेज के हॉकी मैदान पहुंची। अधिकारियों ने एमकेपी इंटर कॉलेज की हॉकी खिलाड़ियों का मैच देखा और टिप्स दिए।
अंत में टीम पवेलियन मैदान पहुंची, जहां फुटबाल मैदान की तारीफ करते की। कहा कि ऐसा ही मैदान हॉकी का भी बने तो अच्छा होगा। कौशिक ने बताया कि उनके अंतर्गत करीब आठ राज्य हैं और उनकी टीम हर राज्य में जाकर हॉकी की स्थिति को जांच-परख रही है।
हॉकी इंडिया के संयुक्त सचिव के एस बाफिला ने बताया कि दून के अलावा हल्द्वानी, नैनीताल, अल्मोड़ा, काशीपुर, हरिद्वार में भी हॉकी की स्थिति का जायजा लिया है।
दून के बाद हरिद्वार में हॉकी बेहतर
हॉकी इंडिया के अधिकारियों ने प्रदेश में दून में हॉकी की स्थिति को सबसे बेहतर बताया। कहा कि इसके बाद हरिद्वार का नंबर आता है। निरीक्षण के दौरान साई के पूर्व हॉकी कोच पीके महर्षि, जिला खेल अधिकारी एसके सार्की, जिला खेल अधिकारी टिहरी कृष्ण कुमार, स्पोर्ट्स कॉलेज में कोच पंकज सिंह, प्रधानाचार्य मनोज शर्मा आदि मौजूद थे।
फिजिकली मजबूत हैं उत्तराखंड के खिलाड़ी
एमपी कौशिक ने कहा कि उत्तराखंड के खिलाड़ियों के पास भले ही सुविधाएं नहीं हैं, लेकिन खेलने का स्तर अन्य सुविधायुक्त राज्यों के बराबर होना बड़ी बात है। कहा कि इसका कारण यहां की भौगोलिक परिस्थितियां हैं।
यहां के खिलाड़ी फिजिकली मजबूत हैं, लैग स्ट्रेंथ, फिटनेस हॉकी में महत्वपूर्ण होती है, और यहां के खिलाड़ियों में यही चीज अन्य राज्यों के खिलाड़ियों से बेहतर है। अगर सुविधाएं मिलने लगे तो उत्तराखंड के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ साबित होंगे।