जब खिलाड़ी ही रेफरी बनकर खेल का निर्णय करने लगे तो खेल का स्तर क्या होगा? यह सोचा जा सकता है।
आयोजकों के पास रेफरी नहीं
देहरादून में आयोजित हो रही जिला स्तरीय बैडमिंटन प्रतियोगिता के उद्घाटन के दौरान शनिवार को कुछ ऐसा ही नजारा दिखाई दिया। यहां आयोजकों के पास रेफरी नहीं थे। ऐसे में खिलाड़ियों को ही रेफरी का जिम्मा संभालना पड़ा।
परेड ग्राउंड स्थित बहुउद्देश्यीय क्रीड़ा हाल में चार अगस्त से आल इंडिया जूनियर रैंकिंग बैडमिंटन टूर्नामेंट होना है। इससे पहले हरिद्वार में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता होगी। खिलाड़ियों का चयन जिला स्तरीय बैडमिंटन प्रतियोगिता से किया जाएगा।
जिला बैडमिंटन एसोसिएशन के तत्वावधान में प्रतियोगिता शनिवार से शुरू हुई। वहीं प्रतियोगिता से पहले मुख्य अतिथि के न पहुंच पाने के कारण आयोजकों को दूसरे मुख्य अतिथि को तलाशना पड़ा।
खिलाड़ियों को बदल-बदल कर रेफरी बनाया
निर्धारित समय से करीब पौने घंटे की देरी से उद्घाटन हो सका। वहीं टूर्नामेंट के लिए एसोसिएशन को रेफरी तक नहीं मिल सके। प्रतियोगिता में शामिल खिलाड़ियों को बदल-बदल कर रेफरी बनाकर बैठाया गया।
दूसरी ओर टूर्नामेंट शुरू होने तक आयोजन कमेटी का कार्यक्रम तय नहीं हो सका था, इस कारण खिलाड़ी अपने मैच का समय और दिन जानने के लिए बार-बार मंच पर चढ़ रहे। मगर आयोजन कमेटी के पास इसका कोई तोड़ नहीं दिखाई दिया।
जिला बैडमिंटन एसोसिएशन नवनीत सेठी का कहना है कि जिले में कोई भी क्वालीफाइड रेफरी नहीं है, इस कारण खिलाड़ियों से ही रेफरी का काम चलाना पड़ता है।
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