क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार के सचिव आदित्य वर्मा अपने राज्य बिहार को देश की क्रिकेट की मुख्य धारा में लौटाने के लिए अदालती लड़ाई पर निकले।
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जब यह लड़ाई शुरू हुई तो उन्हें यह उम्मीद नहीं थी कि यह इतनी दूर तक जाएगी लेकिन मंगलवार की सुबह जब वह सुप्रीम कोर्ट जा रहे थे उस वक्त उन्हें यह पूरी उम्मीद थी कि आज जरूर कुछ बड़ा होगा। हुआ भी वही सुप्रीम कोर्ट ने एन श्रीनिवासन को अध्यक्ष पद छोड़ने के लिए कह दिया।
बीते एक साल में चाहें शरद पवार हों या अरुण जेटली या फिर आईएस बिंद्रा किसी ने भी श्रीनिवासन के खिलाफ खुलकर चुनौती नहीं ली। लेकिन अदने से आदित्य ने न सिर्फ उनसे लोहा लिया बल्कि न्याय का सहारा लेकर उन्हें पटखनी भी दे डाली।
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केजरीवाल की राह चलने के बजाए न्याय के मंदिर गए
आदित्य साफ करते हैं कि न तो वह कोई समाज सेवक हैं और न ही वह अरविंद केजरीवाल की राह पर चलने निकले हैं। उन्हें तो सिर्फ न्याय के मंदिर पर भरोसा है और आगे भी वह इसी पर चलेंगे। वर्मा के मुताबिक आज सुबह जब वह सुप्रीम कोर्ट जा रहे थे तो उन्हें अंदर से विश्वास था कि बड़ा फैसला आ सकता है।
आखिर यह उन बिहार के हजारों की संख्या में क्रिकेटरों की आह है जिन्हें सालों से राष्ट्रीय क्रिकेट खेलने से रोका जा रहा है। उनका करियर सिर्फ श्रीनिवासन की हठधर्मिता के चलते तबाह हुआ।
आदित्य वर्मा कहते हैं आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग की जांच के दौरान अंकित चव्हाण, एस श्रीसंत को सिर्फ एक सुनवाई में सूली पर चढ़ा दिया गया। उन पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया गया। लेकिन जो टीम प्रिसिंपल था और सट्टेबाजी संचालित कर रहा था उसके खिलाफ कुछ नहीं किया गया। इससे बढ़कर श्रीनिवासन का भाई भतीजावाद और क्या हो सकता है।
मुद्गल समिति की जांच से दूर थे श्रीनिवासन
8 अक्तूबर, 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने आईपीएल के छठे संस्करण में स्पॉट फिक्सिंग एवं सट्टेबाजी के आरोपों की जांच के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मुकुल मुद्गल की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय नई जांच समिति गठित की थी। अदालत ने कहा था कि बीसीसीआई अध्यक्ष एन श्रीनिवासन इस जांच समिति से पूरी तरह दूर रहेंगे।
10 फरवरी, 2014 को मुद्गल समिति ने स्पॉट फिक्सिंग से जुड़ी अपनी 170 पृष्ठ वाली रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी। जांच समिति ने श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मैयप्पन को मैच से संबंधित सूचना बांटने और सट्टेबाजी के लिए दोषी माना।
फिक्सिंग के बाद एन श्रीनिवासन
2 जून, 2013 : आईपीएल मैच फिक्सिंग के खुलासे के बाद बीसीसीआई अध्यक्ष एन श्रीनिवासन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिए।
31 जुलाई, 2013 : श्रीनिवासन ने पुन: बीसीसीआई अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाला, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक।
8 अक्तूबर, 2013 : सुप्रीम कोर्ट ने श्रीनिवासन पर से बीसीसीआई अध्यक्ष का पदभार ग्रहण करने संबंधित प्रतिबंध को हटा लिया।
19 दिसंबर, 2013 : मामले की जांच कर रही मुद्गल समिति ने मयप्पन और श्रीनिवासन से मुलाकात की।
मयप्पन बीसीसीआई अध्यक्ष एन श्रीनिवासन के दामाद हैं और चेन्नई सुपरकिंग्स के पूर्व टीम प्रिंसिपल थे। मुंबई पुलिस ने 24 मई को मैयप्पन को धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपों में गिरफ्तार किया था। इससे पहले 15 मई 2013 को इस मामले में मुंबई से क्रिकेटर श्रीसंत, अजीत चंदीला, अंकित चव्हाण और अमित सिंह को गिरफ्तार किया गया था।
एक जून 2013 को आईपीएल कमिश्नर राजीव शुक्ला ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। बीसीसीआई ने जांच पूरी होने तक मयप्पन को निलंबित कर दिया था लेकिन 28 जुलाई 2013 को बोर्ड की जांच कमेटी ने मयप्पन और राज कुंद्रा को क्लीन चिट दे दी थी।
आईपीएल फ्रेंचाइजी नियमों की धारा 11.3 के तहत यदि किसी भी टीम का मालिक फिक्सिंग के आरोपों में दोषी पाया जाता है तो उसे निलंबित कर दिया जाएगा। लेकिन न ही श्रीनिवासन को निलंबित किया गया और न ही उनकी टीम की फ्रेंचाइजी छीनी गई।