मंदिर में जब कभी आप गए होंगे तो पंडित जी ने आपको चरणामृत दिया होगा। चरणामृत यूं तो दिखने में सामान्य पानी की तरह होता है लेकिन इसमें ऐसी शक्तियां होती है कि आप हर दिन मंदिर जाकर चरणामृत लेना चाहेंगे।
चरणामृत सच में अमृत है
शास्त्रों में कहा गया है अकालमृत्युहरणं सर्वव्याधिविनाशनम्। विष्णो पादोदकं पीत्वा पुनर्जन्म न विद्यते।।
यानी भगवान विष्णु के चरणों का अमृतरुपी जल सभी तरह के पापों का नाश करने वाला है। यह औषधि के समान है। जो चरणामृत का सेवन करता है उसका पुनर्जन्म नहीं होता है।
आयुर्वेद में चरणामृत के फायदे
आयुर्वेद की दृष्टि से चरणामृत स्वास्थ्य के लिए बहुत ही अच्छा माना गया है। आयुर्वेद के अनुसार तांबे में अनेक रोगों को नष्ट करने की क्षमता होती है। यह पौरुष शक्ति को बढ़ाने में भी गुणकारी माना जाता है।
चरणामृत के और भी हैं फायदे
तांबे के बरतन में चरणामृत रुप जल रखने से उसमें तांबे के औषधीय गुण आ जाते हैं। चरणामृत में तुलसी पत्ता, तिल और दूसरे औषधीय तत्व मिले होते हैं।
स्वास्थ्य लाभ के साथ ही साथ चरणामृत बुद्घि, स्मरण शक्ति को बढ़ाने भी कारगर होता है।
चरणामृत लेते समय कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ऐसी गलतियां
चरणामृत ग्रहण करने के बाद बहुत से लोग सिर पर हाथ फेरते हैं। संभव है कि आप भी ऐसा करते हों। लेकिन शास्त्रीय मत है कि ऐसा नहीं करना चाहिए। इससे नकारात्मक प्रभाव बढ़ता है।
चरणामृत हमेशा दाएं हाथ से लेना चाहिए और श्रद्घा भक्ति पूर्वक मन को शांत रखकर ग्रहण करना चाहिए। इससे चरणामृत अधिक लाभप्रद होता है।