समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव मंझे हुए राजनीतिक दिग्गज हैं। ऐसे समय जब उनके 75वें जन्मदिन पर रामपुर में हुए भव्य जलसे को लेकर उनकी और सपा सरकार की आलोचना हो रही थी, उन्होंने अपने एक बयान से पूरी बहस की दिशा ही बदल दी।
उन्होंने लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे के शिलान्यास के बहाने अखिलेश सरकार को आड़े हाथ लिया है और दो टूक चेताया है कि सिर्फ शिलान्यास से काम नहीं चलेगा, बल्कि उद्घाटन की तारीखें भी तय करनी होंगी। यह पहला मौका नहीं है, जब मुलायम ने अखिलेश सरकार के कामकाज को लेकर उंगली उठाई और समाजवादी पार्टी के मंत्रियों और विधायकों को सीधे जनता से जुड़ने की बात की है।
लोकसभा चुनाव के पहले भी उन्होंने यह बात कही थी और तब किसी को अंदाजा भी नहीं था कि प्रधानमंत्री पद के संभावित दावेदारों में गिने जा रहे मुलायम सिंह की अगुआई वाली सपा उत्तर प्रदेश में महज पांच सीटों में सिमट कर रह जाएगी। मुलायम सिंह यह अच्छी तरह से जानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की नजर अब 2017 में होने वाले उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव पर है।
बेशक, विधानसभा के उपचुनावों में सपा को कामयाबी मिली है, पर विधानसभा चुनाव के समय मतदाता अखिलेश सरकार के कामकाज को कसौटी पर कसेंगे। संभवतः इसलिए वह अभी से सपा के मंत्रियों और विधायकों को विकास के मुद्दे पर अपना ध्यान केंद्रित करने के लिए कह रहे हैं। मगर इसके साथ ही उन्हें इस बात का भी एहसास होगा कि 2012 में जब उनके बेटे अखिलेश ने युवा मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाली थी, तो सूबे के लोगों को उनसे काफी उम्मीदें थीं, लेकिन ऐसे कई मौके आए हैं, जब अखिलेश पार्टी के दिग्गज नेताओं के आगे बेबस नजर आए हैं।
यही नहीं, मुलायम कहते हैं कि उन्होंने तो 1990 के दशक में ही गांवों को गोद लेने और शौचालय बनाने जैसी योजनाओं की पहल की थी, जिसे अभी मोदी के सबसे बड़े परिवर्तनकारी कदम के तौर पर देखा जा रहा है। लेकिन सवाल उठता है कि उसके बाद से उत्तर प्रदेश में कई बार सपा की सरकार बनी है, लेकिन सूबे के हालात क्यों नहीं बदले। इसके बावजूद यह अच्छी बात है कि सूबे में विकास के मुद्दे पर बात हो रही है, जबकि विधानसभा चुनाव में अभी दो वर्ष से अधिक का समय बाकी है।