प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिलिकॉन वैली में आईटी क्षेत्र के दिग्गजों और भारतवंशियों से हुए संवाद के दौरान भारत को निवेश का नया पता बताया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत का पक्ष मजबूती के साथ रखने के बाद मोदी ने सीधे फेसबुक और गूगल जैसी कंपनियों का रुख कर भारत के साथ ही अपनी सरकार की एक अलग छवि प्रस्तुत की है।
वह उन चुनींदा राष्ट्र प्रमुखों में से हैं, जो गवर्नेंस में सोशल मीडिया और आईटी के दूसरे संसाधनों के इस्तेमाल का महत्व जानते हैं। हैरत नहीं कि सोशल मीडिया पर लोकप्रियता के मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति के बाद मोदी दूसरे नंबर पर हैं। यही नहीं, वह उस भाषा में भी बात करते हैं, जो डिजिटल पीढ़ी को लुभाती है। मसलन, उन्हें अपनी 16 महीने पुरानी सरकार को स्टार्टअप बताने से गुरेज नहीं! वह आई-वे को आज की जरूरत बताते हैं।
फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग के साथ हुए संवाद में मोदी ने महिला सशक्तिकरण से लेकर मेक इन इंडिया जैसे कार्यक्रमों तक में सोशल मीडिया की उपयोगिता बताई है। हालांकि इसी संवाद के दौरान वह अपनी मां को याद करते हुए भावुक भी हो गए थे। मगर यह अपने आपमें महत्वपूर्ण है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री ने निवेशकों से सीधे संवाद का तरीका अपनाया है। वास्तव में 1980 और 90 के दशक में यदि कंप्यूटरीकरण बदलाव का वाहक बना था, तो अब ऑनलाइन सेवाएं न केवल प्रशासन में पारदर्शिता लाने में मददगार हो सकती हैं, बल्कि इनकी वजह से आम लोगों की जिंदगी की मुश्किलें भी दूर की जा सकती हैं।
हालांकि भारत जैसे देश में जहां तेजी से इंटरनेट उपभोक्ताओं और मोबाइल फोन धारकों की संख्या बढ़ रही है, ब्रॉडबैंड और इंटरनेट कनेक्टिविटी अब भी बड़ी चुनौती है। डेढ़ वर्ष का वक्त अधिक नहीं होता, लेकिन अब वक्त आ गया है कि उनकी सरकार ऐसा माहौल भी बनाए, जिससे निवेशक भारत की ओर आकर्षित हों। यह भी ध्यान रखने की जरूरत है कि डिजिटल इंडिया का लाभ वंचित तबके तक भी पहुंचे।
अब यही देख लीजिए कि गूगल के सुंदर पिचाई ने भारत के पांच सौ रेलवे स्टेशनों पर फ्री वाई-फाई सेवा शुरू करने में दिलचस्पी दिखाई है, लेकिन इससे कहीं अधिक जरूरी तो पीने का साफ पानी और साफ-सुथरे शौचालय की व्यवस्था करना है।