मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल असद की सरकार नागरिकों की भुखमरी को युद्ध हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है। एजेंसी के मुताबिक़ दमिश्क़ के यारमूक शरणार्थी कैंप में अब तक 128 लोगों की मौत हो गई है।
एमनेस्टी का कहना है कि अब भी हज़ारों लोग वहां फंसे हुए हैं जो कि 'विनाशकारी मानवीय संकट' का सामना कर रहे हैं। उनके अनुसार कैंपों में रह रहे लोग खाने की तलाश में सड़कों पर निकलने के लिए मजबूर हैं और ऐसा करने पर वे निशानेबाज़ बंदूक़धारियों के निशाने पर रहते हैं। इस सप्ताह के शुरू में कैंप के पास ताज़ा हिंसक झड़पों की ख़बरें भी आई थीं।
एक अनुमान के अनुसार क्लिक करें यारमूक शरणार्थी कैंप में लगभग 17 से 20 हज़ार लोग रहते हैं जिनमें फ़लस्तीनी और सीरियाई शरणार्थी शामिल हैं। यारमूक कैंप के आस-पास कई लड़ाइयां हुई हैं। यारमूक कैंप में अप्रैल 2013 से बिजली नहीं है और इलाक़े के ज़्यादातर अस्पताल बहुत ही बुनियादी मेडिकल सप्लाई के अभाव में बंद पड़े हैं।