प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संयुक्त अरब अमीरात के प्रवास से खाड़ी के इस देश के साथ भारत के रिश्ते को नई ऊंचाइयां मिली हैं, जैसा कि दोनों देशों की ओर से जारी संयुक्त बयान में भी कहा गया है कि वे अपनी दोस्ती को व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदल रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरात के साथ भारत के रिश्ते काफी पुराने हैं और उसका महत्व सिर्फ तेल या गैस की आपूर्ति तक ही सीमित नहीं है।
हालांकि पिछले कुछ दशकों में इस रिश्ते में एक ठहराव-सा आ गया था, लेकिन जिस गर्मजोशी से प्रधानमंत्री मोदी का वहां स्वागत किया गया और खुद मोदी ने जिस तरह से दुबई में भारतवंशियों के बीच वहां के शहजादे की तारीफ में कसीदे पढ़े और उनका आभार जताया, उससे समझा जा सकता है कि दोनों देश नई शुरुआत करने को तैयार हैं। वास्तव में प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का सार दो मुद्दों में निहित नजर आता है। पहला है, आर्थिक साझेदारी और निवेश। प्रधानमंत्री ने बताया है कि संयुक्त अरब अमीरात भारत में साढ़े चार लाख करोड़ रुपये का निवेश करने जा रहा है। हालांकि अभी न तो इसकी अवधि के बारे में पता है और न ही इसका खुलासा किया गया है कि किन-किन क्षेत्रों में यह निवेश किया जाएगा, लेकिन इससे मेक इन इंडिया जैसे कार्यक्रम को लेकर फैल रही निराशा दूर करने में मदद तो मिलेगी ही, खाड़ी के दूसरे निवेशकों का ध्यान भी भारत की ओर जाएगा।
दूसरा मुद्दा है, आतंकवाद, और इस मुद्दे पर सबसे बड़ी सफलता तो यही है कि पाकिस्तान के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को निरपेक्ष रखते हुए संयुक्त अरब अमीरात ने आतंकवाद पर कड़ा प्रहार किया है। दोनों देशों ने धर्म और आतंकवाद के रिश्ते को न केवल पूरी तरह खारिज किया है, बल्कि परोक्ष रूप से पाकिस्तान को आतंकी अड्डों को ध्वस्त करने की चेतावनी भी दी है। हालांकि भारत में मुंबई बमकांड के मोस्ट वाटेंड सरगना दाऊद इब्राहिम के बारे में कोई ठोस पहल सामने नहीं आई। इसके बावजूद आतंकवाद के मुद्दे पर इस अरब देश का साथ मिलने के संदेश दूर तक जाएंगे। इसके साथ ही मोदी ने दुबई के क्रिकेट स्टेडियम के अपने संबोधन से उन लाखों भारतवंशियों का गौरव ही बढ़ाया है, जो लंबे अरसे से दोनों देशों के बीच सेतू का काम कर रहे हैं।