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मक्का में हादसा

Thu, 24 Sep 2015 08:08 PM IST
रमेश भाई ओझा
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सऊदी अरब स्थित पवित्र पक्का मस्जिद के नजदीक हुई भीषण भगदड़ ने बकरीद की खुशियों को गम में बदल दिया है। इस हादसे में सात सौ से अधिक हज यात्रियों की मौत हुई है और आठ सौ से अधिक लोग जख्मी हुए हैं। हादसे की वजह तो जांच से पता चलेगी, लेकिन जो सूचनाएं आई हैं, उनसे यही पता चलता है कि अतीत में हज यात्रा के दौरान हुई भगदड़ और अन्य हादसों से कोई सबक नहीं लिया गया।
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भूलना नहीं चाहिए कि इस हादसे से कुछ दिन पहले मक्का में ही एक क्रेन की वजह से हुई दुर्घटना में सौ से अधिक लोग मारे गए थे। निश्चय ही लाखों लोगों की व्यवस्था करना आसान बात नहीं है, जैसा कि इस वर्ष ही करीब 20 लाख हज यात्री मक्का पहुंचे हैं; मगर कहीं कुछ खामियां जरूर रह गई होंगी, जिसकी वजह से भगदड़ को रोका नहीं जा सका।

सूचनाओं से पता चला है कि यह भगदड़ मक्का के बाहरी हिस्से में मीना के नजदीक बने कैंपों के पास की एक सड़क पर हुई। यहां एक लाख साठ हजार टेंट बनाए गए हैं, जिन्हें कैंप में बांटा गया है। हज यात्रा की तैयारी तो महीनों से चलती रहती है, तो क्या व्यवस्थापकों को इसका अंदाजा नहीं था कि कैंपों के बीच बनी सड़कों पर एक समय में कितने हज यात्री जा सकते हैं? यह कल्पना ही भयभीत करती है कि अगर यह हादसा शैतान को कंकड़ मारने वाली जगह पर हुआ होता, तो तंग जगह होने की वजह से वहां की स्थिति कितनी भयावह होती।
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हालांकि सूचनाएं तो यह भी हैं कि कुछ हज यात्रियों के उतावलेपन के कारण यह हादसा हुआ, मगर ऐसी आशंकाएं तो हर धार्मिक स्थल पर बनी ही रहती हैं और फिर ऐसे मामले आस्था से भी जुड़े होते हैं, जिसकी वजह से लोगों को नियंत्रित करने में मुश्किल आती है।

निश्चय ही दुनिया भर में प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान को काफी हद तक नियंत्रित करने का तंत्र विकसित कर लिया गया है, मगर धार्मिक स्थलों पर होने वाले मानवजनित हादसों को नियंत्रित करने का कोई तंत्र अब तक विकसित नहीं हो सका है। इस हादसे को सबक की तरह लेने की जरूरत है। आखिर वहां भारत सहित तमाम देशों से हज यात्री इबादत करने जाते हैं। उनकी हसरतों को मौत का सबब क्यों बनना चाहिए?
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