कारोबार में परस्पर विश्वास सबसे बड़ी पूंजी होती है, लेकिन देश का सबसे बड़ा कॉरपोरेट घोटाला बताया जा रहा सत्यम कंप्यूटर घोटाला कारोबारी विश्वासघात का सबसे बड़ा उदाहरण है। सीबीआई की अदालत ने इसके कर्ताधर्ता बी रामलिंगा राजू और उसके दो भाइयों सहित दस लोगों को दोषी ठहराया है और उन्हें सात वर्ष तक की सजा सुनाई है।
जब यह घोटाला सामने आया था, तब किसी को अंदाजा तक नहीं था कि कंपनी के भीतर किस तरह की गड़बड़ियां चल रही हैं। अपने तरह के अनूठे मामले में इसके मुख्य साजिशकर्ता बी रामलिंगा राजू ने नाटकीय तरीके से खुद ही इसका खुलासा किया और बताया था कि कंपनी ने अपने खातों में हेराफेरी कर अपना मुनाफा अधिक बताया, जिससे उसके शेयर 70 फीसदी तक बढ़ गए! इसकी शुरुआत कंपनी की बैलेंस शीट में कोई 350 करोड़ रुपये की हेराफेरी से हुई थी और बाद में आकलन किया गया कि यह घोटाला बढ़कर करीब 14,000 करोड़ रुपये का हो गया।
यों इससे पहले भी हर्षद मेहता और केतन पारेख के शेयर घोटाले सामने आए थे, जिनके कारण छोटे से लेकर बड़े निवेशकों तक के पैसे डूब गए और सरकार को भी नुकसान उठाना पड़ा। मगर यह मामला इस लिहाज से अलग था कि गड़बड़ी सामने आने से पहले तक सत्यम कंप्यूटर देश की चौथी बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी थी और उससे पचास हजार कर्मचारियों के हित जुड़े थे। और जब इसका बुलबुला फूटा, तो इसका गंभीर असर देश की सॉफ्टवेयर कंपनियों की साख पर पड़ा। उस वक्त यहां तक आकलन किया गया कि स्थिति जल्द नहीं संभाली गई, तो घोटाले की वजह से देश की जीडीपी पर 0.4 फीसदी तक का असर पड़ सकता है।
सत्यम को तो टेक महिंद्रा ने अधिग्रहीत कर बचा लिया, पर यह खेल कहीं अधिक बड़ा हो सकता था, क्योंकि राजू की नजर सत्यम की आड़ में इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल इस्टेट के कारोबार में भी थी। बेशक इस घोटाले के सामने आने के बाद सरकार और नियामक संस्थाओं के साथ ही निवेशकों का ध्यान कॉरपोरेट गवर्नेंस की ओर गया है। इसके बावजूद लगता है कि सत्यम से कोई सबक नहीं सीखा गया, जैसा कि एसोचेम की एक हालिया रिपोर्ट बताती है कि देश में पिछले दो वर्षों में कॉरपोरेट फ्रॉड में 45 फीसदी की वृद्धि हुई है!