यौन शोषण के आरोप में फंसे कांग्रेस नेता प्रदीप सांगवान कहां हैं, पुलिस इसका पता नहीं लगा पाई है। उनको गिरफ्तार करने देहरादून से जो पुलिस पार्टी सोनीपत पहुंची थी वह भी खाली हाथ लौट गई है। पुलिस ने तीन दिन तक कांग्रेसी नेता की कोठी पर नजर रखी। इस दौरान पुलिस पार्टी ने न तो स्थानीय पुलिस की कोई मदद ली और न ही एसपी और डीएसपी को ही अपनी आमद के बारे में रिपोर्ट दी। देहरादून पुलिस की यह गुपचुप तरीके से हुई कार्रवाई यहां चर्चा का विषय बनी है।
देहरादून में प्रदीप सांगवान के खिलाफ 19 अप्रैल को अपने ज्वॉय वाटरलैंड पार्क की कैशियर के साथ दुराचार करने और अश्लील वीडियो बनाने के आरोप में मामला दर्ज हुआ था। सांगवान तभी से पुलिस की पकड़ से बचने के लिए अंडरग्राउंड हैं। देहरादून से पुलिस की छह सदस्यीय टीम उनको गिरफ्तार करने के लिये सोनीपत पहुंची थी। इस टीम में लेडी इंस्पेक्टर ऊषा चौधरी, इंस्पेक्टर प्रदीप टमटा के साथ चार अन्य पुलिसकर्मी यहां पहुंचे थे।
सूत्र बताते हैं कि तीन दिन तक इन पुलिसकर्मियों ने सेक्टर 14 स्थित प्रदीप सांगवान की कोठी पर नजर रखी, लेकिन छापामारी नहीं की। गुपचुप तरीके से कोठी पर निगाह रखते हुए टीम इस प्रयास में थी कि सांगवान को दबोच लें। पुलिस को यहां सांगवान के बारे में कोई सुराग नहीं लगा तो टीम लौट गई है। प्रदीप सांगवान के मोबाइल के लोकेशन के आधार पर उनका ठिकाना खोजा जा रहा है।
पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
देहरादून पुलिस की जो छह सदस्यीय टीम प्रदीप सांगवान को गिरफ्तार करने के लिए सोनीपत पहुंची थी, उसकी कार्रवाई पर यहां सवाल खड़े किए जा रहे हैं। असल में पुलिस की टीम ने सांगवान की गिरफ्तारी के लिए न तो स्थानीय पुलिस की मदद मांगी यहां तक की अपनी आमद के बारे में एसपी और डीएसपी को कोई सूचना नहीं दी। पुलिस प्रशासन के पास फिलहाल सूचना ये ही है कि टीम यहां आई थी।
यह जानकारी भी पुलिस अधिकारियों को सांगवान के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद हरकत में आई सीआईडी और सिक्योरिटी विभाग द्वारा दी गई थी। देहरादून पुलिस ने प्रदीप सांगवान के आवास पर रहने वाले किसी नजदीकी व्यक्ति से कोई पूछताछ नहीं की।
प्रदीप फिलहाल मौन
दुष्कर्म के आरोपों का सामना कर रहे पूर्व सांसद स्वर्गीय किशन सिंह सांगवान के बेटे प्रदीप सांगवान गिरफ्तारी से बचने के लिए भूमिगत जरूर हैं, लेकिन उन्होंने फिलहाल पूरे मामले में मौन साध रखा है। वे राजनीतिक साजिश का आरोप तो लगा रहे हैं, लेकिन पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए न तो कोर्ट का सहारा लिया है और न ही जांच में कोई सहयोग के लिए आगे आए हैं।
प्रदीप सांगवान से इस बारे में बातचीत हुई तो उनका सिर्फ इतना ही कहना था कि वे अपने स्तर पर पूरे मामले में जांच कर रहे हैं, इसके बाद ही वे आगे की कार्रवाई करेंगे। हालांकि उन्होंने एक-दो दिन में पूरे मामले का पटाक्षेप करने का दावा भी किया था पर वे पिछले 4 दिन से कुछ नहीं कर सके हैं। पुलिस का शिकंजा उन पर कसता जा रहा है।
स्थानीय पुलिस से दूरी का एक कारण यह भी
प्रदीप संागवान को गिरफ्तार करने के लिए सोनीपत पहुंची देहरादून पुलिस का स्थानीय पुलिस से किसी भी प्रकार का संपर्क न करने का कारण संागवान का राजनीतिक प्रभाव माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि चूंकि हरियाणा में कांग्रेस की सरकार है और प्रदीप संागवान पिछले महीने ही भाजपा छोड़ कर कांग्रेस में शामिल हुए हैं।
उनकी कांग्रेस में एंट्री सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने उनके गोहाना स्थित आवास पर पहुंच कर कराई थी। देहरादून पुलिस को संदेह था कि इस स्थिति में स्थानीय पुलिस प्रदीप की गिरफ्तारी में शायद ही उनकी मदद करे। इसी कारण पुलिस की सारी कार्रवाई गुपचुप तरीके से रही।